आगरा में सावन के दूसरे सोमवार को भी भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना घरों में ही की जाएगी। हर बार बल्केश्वर महादेव में इस दिन भव्य मेला लगता था। इस बार नहीं लगेगा। शहर में लगभग 40 किमी की परिक्रमा भी इस बार नहीं होगी। कोरोना के कारण प्रशासन ने अनुमति नहीं दी है।
शहर के प्रमुख शिवालयों राजेश्वर महादेव मंदिर, कैलाश महादेव मंदिर, बल्केश्वर महादेव मंदिर, पृथ्वीनाथ महादेव मंदिर और मन:कामेश्वर मंदिर में सावन के सोमवार को भक्तों की भीड़ रहती थी। रविवार की रात से ही श्रद्धालु आना शुरु हो जाते थे।
सोमवार सुबह भोले का जलाभिषेक किया जाता था। सभी मंदिरों में भोले का भव्य श्रृंगार इस बार भी होगा। श्रद्धालु इसके दर्शन फेसबुक और यू ट्यूब पर कर पाएंगे। सभी मंदिरों के फेसबुक पेज हैं जो उनके ही नाम से हैं।
700 साल पहले हुई बल्केश्वर महादेव मंदिर की स्थापना
बल्केश्वर महादेव मंदिर के महंत कपिल नागर ने बताया कि मंदिर का प्राचीन नाम बिल्वकेश्वर महादेव मंदिर है। पहले यहां बेल के वृक्षों का जंगल था।तकरीबन 700 वर्ष पहले यहां शिवलिंग प्रकट हुआ था। इसी स्थान पर लोगों ने पूजा अर्चना शुरु की और मंदिर बन गया।
चंदन-केसर से होता है श्रृंगार
महंत ने बताया कि मंदिर में शिवलिंग का श्रृंगार चंदन और केसर से होता है। भक्तों को चंदन केसर का ही प्रसाद दिया जाता है। मान्यता है कि जो भी भक्त सच्चे मन से आता है, उसकी हर मनोकामना पूरी होती है।
जैसी प्रभु की ईच्छा... फेसबुक पर करेंगे दर्शन
पथवारी की कोमल सिंह ने कहा कि यह पहला सावन है जब मंदिर नहीं जा पा रहे हैं लेकिन क्या करें, जैसी प्रभु की ईच्छा। सोमवार को बल्केश्वर महादेव के दर्शन फेसबुक पर करेंगे।
सोमवार को खोले जाएं मंदिर
शहीद नगर की सुनीता देवी ने कहा कि प्रशासन को चाहिए कि सावन में सोमवार के लिए मंदिर को खोल दे। भले ही वहां पुलिस तैनात रहे जो सामाजिक दूरी का पालन कराए। श्रद्धालुओं को सकारात्मक ऊर्जा मिलेगी।
फेसबुक पर रोज शामिल होते हैं आरती में
सिकंदरा निवासी पिंका शर्मा ने कहा कि शहर के अलग अलग शिवालयों की आरती अब फेसबुक पर है। हम इसी के माध्यम से रोज आरती में शामिल हो जाते हैं। सोमवार को भी फेसबुक पर ही दर्शन करेंगे