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आखिर संजीव रस्तोगी को जाना पड़ा जेल

Wed, 07 Sep 2016 11:40 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
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एसएन मेडिकल कालेज में चेकअप के बाद भेजा गया जेल - फोटो : अमर उजाला
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जूता कारोबारी राजकुमार लालवानी की हत्या के आरोपी सराफ संजीव रस्तोगी को आखिर जेल जाना पड़ा। उसने अस्पताल में रहने के लिए तिकड़म तो खूब किए लेकिन उसकी चाल चल नहीं पाई। एसएन मेडिकल कालेज के डाक्टरों ने चेक अप के बाद उसे भर्ती करने से मना कर दिया। इसके बाद पुलिस उसे जेल ले गई।
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भरतपुर हाउस गोलीकांड 20 जून को हुआ था। इसमें कुल चार गोलियां चली थीं। इनमें से एक राजकुमार लालवानी को लगी। इससे उनकी मौत हो गई। दो संजीव को लगी। वह घायल हुआ था। उसका तभी से दिल्ली में उपचार चल रहा था। एक अस्पताल ने रेफर किया तो दूसरे में चला गया।

वहां से छुट्टी मिलने के बाद पुलिस ने उसे मंगलवार को कोर्ट में पेश किया। यहां उसने वकील के माध्यम से बताया कि उसकी तबीयत खराब है, उसे उपचार की जरूरत है। इसके चलते उसे न्यायिक हिरासत में एसएन मेडिकल कालेज भेजा गया। यहां डाक्टरों ने उसका मेडिकल चेक अप किया। इसमें पाया गया कि उसे भर्ती किए जाने की जरूरत नहीं है। इसकी रिपोर्ट मिलने पर पुलिस उसे जेल ले गई।
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उधर, संजीव की जमानत के लिए उसके अधिवक्ता राजवीर सिंह शुक्ला ने सीजेएम ओम प्रकाश की कोर्ट में प्रार्थना पत्र दिया। इसे खारिज कर दिया गया। इसमें कहा गया कि राजकुमार ने संजीव को तीन गोली मारने के बाद खुदकुशी की थी।

वीआईपी ट्रीटमेंट पर फंस गई पुलिस
संजीव रस्तोगी को सोमवार सुबह दिल्ली के अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया। लेकिन वह आगरा पहुंचा देर रात। सफर दो घंटे का था लेकिन उसने दस घंटे में पूरा किया। इसके बाद उसे पुलिस ने थाना पर नहीं रखा बल्कि होटल में जाने दिया। वहां से मंगलवार सुबह उसे थाना लाया गया। उसे पूरी तरह वीआईपी ट्रीटमेंट दिया गया। इसका पता चलने पर आला अधिकारी नाराज हो गए हैं। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस पर थाना पुलिस से जवाब तलब भी किया गया है। सूत्रों ने बताया कि थाना पुलिस ने सफाई दी है। कहा गया है कि संजीव को थाना पर रखने में खतरा था। अगर उसे कुछ हो जाता तो बहुत भारी पड़ता। इसलिए उसे होटल में रुकने दिया गया।

अब संजीव और गागा में हो गई रार 
राजकुमार की हत्या से पहले संजीव और गागा पक्के दोस्त थे। यहां तक की संजीव भरतपुर हाउस कालोनी के रजिस्टर में अपना नाम गागा दर्ज कराता था। लेकिन इस हत्याकांड में पुलिस कार्रवाई के चलते दोनों में रार हो गई है। हालांकि पुलिस ने हत्या के मामले में नामजदगी के बावजूद गागा को क्लीन चिट दे दी लेकिन इसी मामले से जुड़े चौथ वसूली केस में वह फंस गया है। उसके खिलाफ वारंट जारी हो चुके हैं। कभी भी घर की कुर्की हो सकती है। सूत्रों ने बताया कि गागा नजदीकियों से कह रहा है किअगर संजीव रजिस्टर में उसका नाम दर्ज न कराता तो वह नहीं फंसता। उधर संजीव का परिवार भी गागा से खफा बताया गया है। पुलिस सूत्रों का कहना है कि संजीव, राजकुमार के पास गागा के कहने पर ही जाता था। उससे राजकुमार पर दबाव बनाने के लिए कहा था। इसी चक्कर में गोलीकांड हुआ। हालांकि दोनों परिवार इस बारे में खुलकर कुछ बोल नहीं रहे।

गागा पर पैसा हड़पने का आरोप
उत्तर प्रदेश खटीक समाज की मीटिंग में गागा और उसके साथी राजू वर्मा पर कई लोगों के पैसे लेकर भागने का आरोप लगाया गया। वक्ताओं ने कहा कि गागा की दुकान खटीक पाड़ा में है। यह कई महीनों से बंद पड़ी है। उससे जेवर बनवाने के लिए कई लोगों ने पैसा दे रखा था। उसने इसे हड़प लिया है। तेजेंद्र राजौरा, नानूराम घेते, गोपाल भिलवारा, चंद्रभान, लक्ष्मीनारायन, सुभाष राजौरा, अमर सिंह मौजूद रहे।
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