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Etah: पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह की गिरफ्तारी से सपा को लगा बड़ा झटका, प्रो. रामगोपाल से है रिश्तेदारी, जानें राजनीतिक इतिहास 

Fri, 10 Jun 2022 06:26 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, एटा

सार

अलीगंज से पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव की गिरफ्तारी से समाजवादी पार्टी जिला संगठन को बड़ा झटका लगा है। सपा के कद्दावर नेताओं में सुमार रामेश्वर सिंह पार्टी के थिंक टैंक कहे जाने वाले प्रो. रामगोपाल के रिश्तेदार भी हैं। 
 
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पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एटा में अलीगंज से पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव जिले में सपा के कद्दावर नेता हैं और यहां पार्टी उनके पीछे ही चलती है। एटा ही नहीं, फर्रुखाबाद जिले में भी उनकी राजनीति की धमक है। तीन बार अलीगंज के विधायक रह चुके हैं। प्रो. रामगोपाल से रिश्तेदारी की वजह से पार्टी हाईकमान तक उनके सीधे संबंध हैं। ऐसे में उनकी गिरफ्तारी पार्टी के लिए बड़ा झटका है।

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अलीगंज के पूर्व विधायक रामेश्वर सिंह यादव और उनके भाई जुगेंद्र सिंह यादव पार्टी की स्थापना से ही जुड़ गए थे। धीरे-धीरे पार्टी के साथ ही उनका भी कद बड़ा होता गया। 1996 में जब पहली बार विधायक बने तो राजनीतिक करियर को ऊंची उड़ान मिली थी। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और दोनों भाई राजनीति में सफलता की सीढ़ियां चढ़ते गए। इस बीच पार्टी के थिंक टेंक कहे जाने वाले प्रो. रामगोपाल के परिवार से उनकी रिश्तेदारी हो गई। इससे पार्टी और जिले में उनकी अहमियत और बढ़ गई। 

फर्रुखाबाद की राजनीति में भी दखल

रामेश्वर सिंह यादव 2002 और 2012 में भी विधायक बने और उनकी राजनीतिक पकड़ के आगे पार्टी के अन्य नेता बौने साबित होते गए। इसके साथ ही पूर्व विधायक ने पड़ोसी जनपद फर्रुखाबाद की राजनीति में भी दखल बनाना कर दिया। वर्ष 2014 में सपा की टिकट पर उन्होंने लोकसभा चुनाव लड़ा था। हाईकमान तक सीधे संबंध होने के कारण वहां पूर्व मंत्री के बेटे को टिकट से हाथ धोना पड़ा था, जबकि फर्रुखाबाद के राजेपुर ब्लॉक से पूर्व विधायक के पुत्र डॉ. सुबोध यादव ब्लॉक प्रमुख रहे हैं। वर्तमान में वह जिला पंचायत सदस्य हैं। 

दोनों भाइयों को एक साथ मिला था टिकट 

पार्टी में रामेश्वर सिंह यादव का रसूख ही कहा जाएगा कि वर्ष 2017 और 2022 के विधान सभा चुनावों में रामेश्वर सिंह सहित उनके छोटे भाई जुर्गेंद्र सिंह को भी टिकट दिया गया, जबकि प्रदेश में परिवार में एक से ज्यादा टिकट न दिए जाने की बात कही जा रही थी। 

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