क्रिकेट समेत बालीबाल का पवेलियन (दर्शकों के बैठने का स्थान) पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया है। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि दर्शकों के बैठने वाले स्थान पर इतने गहरे गड्ढे हो गए हैं कि नजर चूकते ही जान जाने की नौबत आ सकती है। पवेलियन के ऊपर बड़ी टिनशेड खस्ता हालात में है। स्टेडियम के आफिस के बाहर लगी टाइल्स उखड़ चुकी हैं। स्टेडियम के टीटी हॉल की भी हालत कुछ इसी प्रकार की है। स्टेडियम की दीवार का जगह-जगह से प्लास्टर उखड़ा हुआ है। इसका असर प्रतियोगिताओं पर भी असर पड़ता है। प्रतियोगिता खेलते के लिए बाहर से आने वाले खिलाड़ी स्टेडियम की दशा देखकर चौंक जाते हैं।
स्टेडियम के निर्माण की नहीं है जानकारी
एकलव्य स्टेडियम का इतिहास काफी पुराना है। इसका निर्माण कब हुआ इसकी ठीक ठाक जानकारी तो किसी को नहीं है, लेकिन बताया जाता है कि 1974 में खेल विभाग की स्थापना से पहले स्टेडियम बना हुआ था। स्टेडियम के निर्माण को लेकर लोग तरह-तरह की बातें भी कहते हैं। कोई कहता है कि इसका उद्घाटन भारत के प्रथम प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने किया था, लेकिन इसको प्रमाणित करने वाली कोई शिला पट्टिका स्टेडियम में नहीं लगी है।