सपा छोड़कर हाथी पर सवार हुए सिद्दकी
समाजवादी पार्टी से नगर पंचायत अध्यक्ष की टिकट नहीं मिलने पर वारिस सिद्दकी की ने साइकिल छोड़ हाथी की सवारी कर ली। इस दौरान उन्होंने कहा वह सपा नेतृत्व का फैसला था, यह उनका फैसला है। कहा कि उनका प्रमुख उद्देश्य जनता की सेवा करना है। पहले भी वह सपा से बगावत कर चुनाव लड़ चुके हैं।समाजवादी पार्टी के नगर अध्यक्ष रहे वारिस सिद्दकी समाजवादी पार्टी से अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी कर रहे थे। राजनीतिक गलियारों में उन्हें मजबूत दावेदार माना जा रहा था। लेकिन सपा ने केपी सिंह यादव पर भरोसा जताया तो वारिस सिद्दकी ने बगावत कर दी। 2017 में हुए नगर निकाय चुनावों में उन्होंने सपा से टिकट मांगी थी। टिकट नहीं मिलने निर्दलीय मैदान में उतरे और दूसरे स्थान पर रहे। जबकि सपा तीसरे स्थान पर ही थी।
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1992 में सपा में जुड़े थे अब्दुल हई, छोड़ने पर अफसोस
फरिहा चेयरमैन अब्दुल हई ने 30 साल बाद आखिरकार साइकिल की सवारी को छोड़कर हाथी पर सवार हो गए। वर्ष 2017 में सपा के टिकट पर सपा के चेयरमैन बने अब्दुल हई ने कहा कि सपा छोड़ने पर अफसोस है, लेकिन लगातार काम करने के बाद टिकट न मिलना गलत था। इसके कारण सपा छोड़कर बसपा में वह शामिल हुए हैं।