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UP: 'CJI की कोर्ट में होगी सुनवाई..', रेलवे के सेवानिवृत्त अधिकारी को सात दिन रखा डिजिटल अरेस्ट, 28 लाख की ठगी

Thu, 16 Oct 2025 10:34 PM IST
अरुन पाराशर संवाद न्यूज एजेंसी, आगरा

सार

उत्तर प्रदेश के आगरा में  रेलवे के सेवानिवृत्त अधिकारी का डिजिटल अरेस्ट रखने का मामला सामने आया है। साइबर अपराधियों ने अधिकारी को इस कदर डराया कि उन्हें सात दिन तक घर से बाहर भी नहीं निकलने दिया।
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digital arrest - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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आपके आधार कार्ड पर लिए गए सिम से लोगों को ब्लैकमेल किया जा रहा है। अवैध तरीके से विज्ञापन और संदेश लोगों को भेजे जा रहे हैं। खाते खोलकर काले धन का लेन-देन किया गया है। मामले की सुनवाई जस्टिस बीआर गवई की कोर्ट में वर्चुअल की जाएगी। अगर किसी को बताया तो पूर्व में पकड़े गए अपराधी तुम्हारी हत्या कर सकते हैं। मामला देश की सुरक्षा से जुड़ा हुआ है...। कुछ इसी तरह साइबर ठगों ने आईपीएस अधिकारी बनकर रेलवे के सेवानिवृत्त अधिकारी को 7 दिन तक डिजिटल अरेस्ट कर 28 लाख रुपये की ठगी कर ली। अब मामला साइबर क्राइम थाने में पहुंचा है।
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रकाबगंज क्षेत्र के रहने वाले रेलवे के सेवानिवृत्त अधिकारी ने बताया कि पहली बार काॅल 25 सितंबर को आया था। काॅल करने वाले ने कहा कि वो दूरसंचार नियामक आयोग का पीआरओ विजय कुमार बोल रहा है। बताने लगा कि तुम्हारे आधार कार्ड से एक सिम मुंबई से खरीदा गया है। इस नंबर का प्रयोग लोगों के पास अवैध तरीके से विज्ञापन भेजने के लिए किया जा रहा है। साथ ही ऐसे संदेश भेजे जा रहे हैं, जिससे लोग उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं। इसके बाद बताया कि जल्द ही मुंबई पुलिस आपको बुलाएगी।

आते रहे काॅल पर काॅल
बाद में किसी संदीप राव का काॅल आया। बताया कि यह एक विशेष पोर्टल है। उस पर मुंबई पुलिस का लोगो भी लगा हुआ था। कहा कि आईपीएस अधिकारी विजय खन्ना वीडियो काॅल करके जानकारी लेंगे। विजय खन्ना ने खुद को अपराध शाखा मुंबई का अधिकारी बताते हुए कहा कि जेट एयरवेज के समन्वयक नरेश गोयल के साथ सहयोग में आप मनी लॉन्ड्रिंग के केस में संदिग्ध हैं। उन्होंने नरेश गोयल और सहयोगी संदिग्धों के कुछ वीडियो भी भेज दिए। जोकि केनरा बैंक के पूर्व निदेशक के उच्च अधिकारी, शिक्षा ब्यूरो के पूर्व उप निदेशक, संदिग्ध दिनकर गुप्ता आर्थिक अपराध जांच इकाई के पूर्व उप प्रमुख और दूरसंचार ब्यूरो की पूर्व कर्मचारी ऋषिमा सचदेव के थे। इसके बाद बताया कि उनके नाम से केनरा बैंक का एटीएम कार्ड की फोटो भी भेजी। बताया कि यह नरेश गोयल से बरामद किया गया था।
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और यूपीआई में हुआ है लेन-देन
इसका उपयोग यूपीआई लेनदेन के लिए किया गया था। उन्होंने मोबाइल पर एक रेड नोटिस भी भेजा। इसके बाद एफआईआर की काॅपी, गोपनीय अनुबंध पत्र, सहमति पत्र और प्रवर्तन निदेशालय से जारी फर्जी गिरफ्तारी वारंट भी भेज दिया। धमकी दी कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मामला है। इसलिए अपने परिजन ही नहीं पड़ोसियों तक को भी कुछ नहीं बताया जाए। कहा कि अगर किसी को बताया तो अपराधी हत्या कर सकते हैं। सात दिन तक डिजिटल अरेस्ट किया।

आरोप है कि साइबर ठग विजय खन्ना ने न्यायमूर्ति बीआर गवई के समक्ष वीडियो कॉलिंग से पेशी कराने को कहा। सुनवाई के बाद गिरफ्तारी वारंट को होल्ड करने और 7 दिनों के भीतर वित्तीय संपत्तियों को सरेंडर करके यूपीआई लेनदेन के माध्यम से जांच करने के बारे में बताया। बाद में खाते में जमा रकम का सरेंडर करने का दबाव बनाया। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देकर पेंशन खाते से 17 लाख रुपये जमा करा लिए। बाद में कई दिन डिजिटल अरेस्ट किया गया। बाद में पत्नी के खाते से भी 11 लाख रुपये जमा करा लिए।

डीसीपी सिटी सोनम कुमार ने बताया कि त्योहार में साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठग रहे हैं। ऐसे में ध्यान रखें कि किसी के लालच में नहीं आए। मोबाइल पर आने वाले अनजान लिंक पर क्लिक नहीं करें। अगर कोई पुलिस अधिकारी बताकर काल करता है तो समझ जाएं ठगी होने वाली है। डिजिटल अरेस्ट जैसी कोई चीज नहीं होती है। काल करके कोई पुलिस अधिकारी, परिचित और धमकाकर रुपयों की मांग करता है तो समझ जाएं कि ठगी होने वाली है। तुरंत काल काट देना चाहिए। इसकी शिकायत पुलिस के हेल्पलाइन नंबर 1930 पर करें।
 
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