महाराष्ट्र और दक्षिण के संत कम
स्थानीय संतों के अनुसार महाराष्ट्र और दक्षिण भारत के संतों की संख्या कम हो सकती है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान से आने वाले संत, महात्माओं व श्रद्धालुओं की संख्या ठीकठाक रहेगी।
आस्था तो है लेकिन स्नान कैसे
यमुना का पानी गंगा जैसा निर्मल होना संभव नहीं है, भले ही इसमें गंगा का पानी मिश्रित कर दिया जाए। कुंभ के दौरान स्नान करने वाले लोगों की भीड़ ही कुंभ मेला को सफल बनाएगी। कुंभ में तीन शाही स्नान होंगे।
कुंभ के तीन शाही स्नान
- 27 फरवरी माघ पूर्णिमा
- 9 मार्च फाल्गुन कृष्ण एकादशी
- 13 मार्च फाल्गुन अमावस्या
मथुरा जनपद की स्थिति
- होटलों की संख्या-120 करीब
- गेस्टहाउस की संख्या- 225 करीब
- आश्रम की संख्या- 460 करीब
- 2019 में पर्यटकों की संख्या -50 लाख से अधिक रही (स्रोत: पर्यटन विभाग)
होटल संचालक सुरेश बंसल ने बताया कि मथुरा में ही करीब 50 होटल हैं। कुंभ से एक माह पहले ही बुकिंग हो जाती थी। लेकिन अभी ऐसा नहीं है। फोन भी नहीं आ रहे हैं। होटलों का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।
गेस्ट हाउस संचालक प्रमोद गर्ग कसेरे ने कहा कि बिजली और कर्मचारियों का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है। कोरोना के कारण टूरिस्ट आने बंद हो गए हैं। कमाई बिल्कुल बंद हो गई। अभी कोरोना का डर गया नहीं है।
वृंदावन अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष महंत हरिशंकर दासा नागा ने कहा कि इस बार का कुंभ दिव्य और आकर्षक होगा। कुंभ में संत-महात्माओं की संख्या कम नहीं रहेगी। यहां पर कोरोना का प्रभाव कम ही दिखेगा। तैयारियां अच्छी हो रही हैं।