शुद्ध देशी घी का लोगो नकली घी बनाने वाले पैकेट पर लगाया गया था। इतना ही नहीं पता और लाइसेंस भी फर्जी था। 150 रुपये में तैयार करने के बाद 640 रुपये में 50 फीसदी कमीशन पर दुकानदारों को नकली घी बेचा जाता था।
आगरा की विजय नगर के अवनीश गर्ग ने लोगों को चकमा देने के लिए नकली घी की जबरदस्त ब्रांडिंग की थी। आकर्षक पैकेट के साथ स्वाद और सेहत का हवाला देते हुए शुद्ध देशी घी का लोगो छाप रखा था। भ्रमित करने के लिए फर्जी खाद्य सुरक्षा मानक दर्ज थे।
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आरडीएफआई ग्रुप का स्वदेशी डेयरी मिल्क ब्रांड से नकली घी तैयार होता था। पैकेट पर निर्माण इकाई का पता खसरा नंबर 175/2 इंडस्ट्रीज एरिया फाउंड्री नगर नुनिहाई लिखा था, जबकि विजय नगर में नकली घी बनते हुए पकड़ा गया। एफएसएसएआई लाइसेंस संख्या भी फर्जी लिखा था। पैकेट पर न्यूट्रीशनल इनफार्मेशन भी लिखा था। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) के जिला अभिहित अधिकारी अमित कुमार सिंह ने बताया कि पैकेट देखकर कोई भी भ्रमित हो जाएगा। इस पर खाद्य सुरक्षा के सभी नियम और मानक दर्ज थे।
50 फीसदी कमीशन पर थोक दुकानदार को करता था बिक्री
एफएसडीए के जिला अभिहित अधिकारी के अनुसार पूछताछ में अवनीश गर्ग ने बताया कि नकली घी बनाने के लिए वनस्पति और रिफाइंड सोयाबीन तेल को गर्म कर उसमें घी की खुशबू के लिए एसेंस मिलाता था। एक लीटर पैकेट तैयार करने में 130-150 रुपये की लागत आती थी। 50 फीसदी कमीशन पर इसे दुकानदारों को बेचता था। मोटे मुनाफे के लिए दुकानदार लोगों को एमआरपी 640 रुपये पर बिक्री करते थे।
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नमूने की रिपोर्ट आते ही
मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी राजेश गुप्ता ने बताया कि नकली घी बनाने की फैक्टरी से 6 नमूने लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे हैं। इसमें रिफाइंड सोयाबीन, वनस्पति, एसेंस के अलावा तीन नमूने पैकेट और भगोने में मिले नकली घी के सैंपल शामिल हैं। रिपोर्ट आने के बाद धाराएं बढ़ाई जाएंगी। कोर्ट में आरोपी को सजा दिलाने में भी सहायक साबित होंगी।