Mathura: बांके बिहारी मंदिर क्षेत्र में चूहों ने खोखली कर दी जमीन
- फोटो : अमर उजाला
तीर्थनगरी मथुरा के वृंदावन में आतंक का पर्याय बने बंदरों की समस्या से स्थानीय नागरिक और श्रद्धालुओं को निजात मिली नहीं है कि अब चूहे यहां समस्या बनते जा रहे हैं। वृंदावन के बांके बिहारी मंदिर और उसके आसपास बड़ी संख्या में चूहे हैं जो न केवल खाने पीने का सामान खराब कर रहे हैं बल्कि जमीन भी खोखली कर रहे हैं।
बंदरों के बाद चूहे बन रहे समस्या
वृंदावन में बंदरों की समस्या का निस्तारण हुआ नहीं कि अब यहां चूहे समस्या बन गए। वैसे तो चूहे हर जगह मिल जाते हैं लेकिन इस समय बांके बिहारी मंदिर और उसके आसपास चूहों ने लगता है जैसे अपना साम्राज्य स्थापित कर लिया हो। यहां मंदिर से लेकर आसपास की गलियों में चूहे आसानी से घूमते दिख सकते हैं। यह चूहे इस कदर बड़े हैं कि इनको देखकर इंसान डर जाए।
बांके बिहारी मंदिर में पुजारी नहीं छोड़ते जलता दीपक
चूहों का आतंक बांके बिहारी मंदिर में किस कदर है यह बताया मंदिर के पुजारी ज्ञानेंद्र गोस्वामी ने। मंदिर के गोस्वामी ने बताया कि यहां चूहों की संख्या हजारों में है। मंदिर बंद होने के बाद चूहे घूमते दिख जाएंगे। आलम यह है कि वह गर्भ गृह में जलता दीपक छोड़ कर नहीं जाते।
चूहे खोद रहे जमीन
पुजारी ज्ञानेंद्र गोस्वामी ने बताया कि चूहे जमीन खोखली कर रहे हैं। आए दिन कोनों में मिट्टी का ढेर लगा मिल जाता है। प्रतिदिन दोपहर और शाम को सफाई होती है तो चूहों द्वारा निकाली गई मिट्टी को हटा दिया जाता है। ज्ञानेंद्र गोस्वामी ने गेट संख्या 2 के पास एक कोने में चूहों द्वारा खोदी गई मिट्टी को पड़ा दिखाया। ज्ञानेंद्र गोस्वामी ने बताया कि कोरोना के समय मंदिर का फर्श का काम भी किया गया था।
भोग,प्रसाद और खाने पीने के समान होने के कारण हैं चूहे
मंदिर के गोस्वामी मयूर ने बताया कि चूहे तो हैं लेकिन यह सब बांके बिहारी जी के भक्त ही हैं। पहले भोग भंडार था वहां रहते थे अब भोग भंडार बंद हो गया तो यह पूरे मंदिर में घूमते हैं। चूहे भोग,प्रसाद और अन्य खाने पीने की वस्तुओं को खाने के लिए रहते हैं। मयूर गोस्वामी ने बताया कि मंदिर के आसपास के इलाके को चूहों ने खोद रखा है।
मंदिर प्रबंधन ने कहा चूहे हैं,लेकिन उनको मारते नहीं हैं
मंदिर में बढ़ते चूहों के आतंक के बारे में मंदिर के प्रबंधक मुनीश शर्मा ने बताया कि चूहे हैं लेकिन क्या किया जा सकता है। यह सब तो जमीन के जीव हैं। मंदिर में मौजूद चूहों को कभी मारा नहीं जाता वह गणेश जी के वाहन के रूप में हैं। यहां चूहों के आतंक से निपटने के लिए कभी कभी पिंजरे लगा देते हैं। जब चूहे पिंजरे में आ जाते हैं तो उनको यमुना किनारे छोड़ दिया जाता है।
नगर निगम को देना होगा ध्यान
चूहों की बढ़ती संख्या और उनके द्वारा की जा रही जमीन खोखली किसी दिन बड़ी घटना को न अंजाम दे दे। चूहों के बढ़ते आतंक को देखते हुए मथुरा वृंदावन नगर निगम को इस तरफ ध्यान देना चाहिए जिससे इस समस्या का निस्तारण हो सके।