कासगज। आपूर्ति विभाग ने जिले के 107 लोगों को भ्रष्टाचार में शामिल पाए जाने पर राशन कार्ड निरस्त कर दिए हैं। ये किसान समृद्ध होते हुए भी सरकारी राशन लेकर गरीबों के हक पर डाका डाल रहे थे। सरकारी क्रय केंद्रों पर इनके गेहूं की बिक्री एवं आय प्रमाणपत्र की जांच के बाद ये अमानवीय मामला सामने आया है।
कोरोना काल से पहले शासन से कार्डधारकों को 2 रुपये किलो गेहूं व 3 रुपये किलो चावल दिया जाता रहा। अब सरकार पिछले कई माह से नि:शुल्क राशन का वितरण करा रही है। यह राशन माह में दो बार दिया जा रहा है। लेकिन तमाम लोग ऐसे हैं जिन्होंने फर्जी आय प्रमाणपत्र तैयार करके अपने राशन कार्ड बनवा लिए हैं। सरकारी गेहूं की खरीद के दौरान जिन किसानों ने तीन लाख से अधिक का गेहूं खरीद केंद्र पर बेचा ऐसे किसानों की जांच की गई। जांच में मामला सामने आया कि ये लोग समृद्ध होते हुए भी नि:शुल्क राशन का लाभ ले रहे हैं। जिला में ऐसे 107 आरोपी चिह्नित किए गए हैं। फर्जीवाड़े में शामिल आरोपियों के गृहस्थी राशन कार्ड विभाग ने निरस्त कर दिए हैं।
जिलें में गेहूं खरीद के दौरान लाखों रुपये की फसल बेचने वाले किसानों की जांच की गई थी। जांच में फर्जीवाडे़ का खुलासा होने के बाद इन किसानों के राशन कार्ड निरस्त कर दिए गए हैं। - केएन सिंह, जिला पूर्ति अधिकारी