रथ पर सवार होकर निकले ठाकुर बांकेबिहारी महाराज
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मथुरा के वृंदावन में शुक्रवार को जगन्नाथ रथ यात्रा के अवसर पर श्री बांकेबिहारी मंदिर में ठाकुर जी ने सोने-चांदी से बने रथ पर विराजमान होकर अपने भक्तों को दिव्य दर्शन दिए। वर्ष में एक बार जगन्नाथ रथयात्रा पर इस दिव्य रथ पर विराजित ठाकुर श्रीबांकेबिहारी के दर्शन पाकर भक्त अपने को धन्य मान रहे थे। मंदिर प्रांगण बांकेबिहारी के जयकारों से गूंज रहा था।
मंदिर को फूलों से सजाया गया। मंदिर परिसर में सुगंधित इत्रों को छिड़काव किया गया। इसके बाद ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज भी भव्य फूलबंगले के बीच सजाए स्वर्ण रजत निर्मित रथ पर विराजित हुए। सुबह और शाम को पट खुलते ही भक्तों का रेला मंदिर प्रांगण में प्रवेश कर गया। भक्त अपने आराध्य ठाकुरजी के दिव्य स्वर्ण रजत रथ पर दर्शन पाकर अभिभूत हो गए।
सेवायत बाल कृष्ण गोस्वामी, ब्रजेंद्र किशोर गोस्वामी लाला भैया और ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी छोटू भैया ने बताया कि सोने और चांदी से बने इस भव्य रथ में चार घोड़े और एक बग्गी है। बग्गी पर सवार होकर ही ठाकुर श्रीबांकेबिहारी महाराज भक्तों को दर्शन देते हैं। यह रथ चंद्र आनंद निकुंज बिहारी चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा हर वर्ष रथयात्रा महोत्सव के दिन मंदिर में ठाकुरजी के दर्शनों के लिए सजाया जाता है।
आचार्य बृजेंद्र किशोर गोस्वामी लाला भैया ने बताया कि वर्ष में एक बार जन-जन के आराध्य बिहारी जी महाराज स्वर्ण-रजत रथ पर विराजमान होकर भक्तों को दर्शन देते हैं। बांकेबिहारी मंदिर में यह रथ सेवा प्रति वर्ष जगन्नाथ रथ यात्रा के अवसर पर चंद्र आनंद निकुंज बिहारी चैरिटेबल ट्रस्ट के माध्यम से की जाती है। यह रथ 2013 में बनवाया गया था।