अपनों ने ही दगा देकर अस्मत का सौदा कर दिया। इस सदमे से उबर भी नहीं पाई थी कि लोगों के ताने सुनने पड़ गए। बाल मन पर चोट लगी तो घर छोड़कर कहीं दूर अनजान जगह पर बसेरा बनाया। यह दर्द है सैंया की 17 वर्षीय किशोरी और उनकी दादी का। तीन बार दुष्कर्म की शिकार होने के बाद वह गुमनाम जिंदगी जीने के लिए मजबूर है। शरीर पर जख्म देने वालों को सजा दिलाने की ठानकर रोजाना पुलिस और कोर्ट के दरवाजे पर पहुंच रही हैं।