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रक्षाबंधन: यहां मुस्लिमों की कलाई पर सजती है राखी, वर्षों से निभा रहे भाई-बहन का रिश्ता

Sun, 26 Aug 2018 09:35 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला आगरा
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मुस्लिम भाइयों को राखी बांधतीं हैं मुस्लिम बहनें - फोटो : अमर उजाला
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मुगल बादशाह बाबर और रानी कर्मावती की राखी का किस्सा इतिहास के पन्नों में दर्ज है, लेकिन ताजनगरी आगरा में कई मुस्लिम भाई बरसों से भाई-बहन के इस अनमोल रिश्ते को निभाते चले आ रहे हैं। 

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मुस्लिम भाई हर रक्षाबंधन पर अपनी हिंदू बहन से राखी बंधवाना नहीं भूलते हैं। साथ ही रक्षा का वचन देकर भाईचारे को मजबूत करते हैं। ये लोग विधि विधान से इस पावन पर्व को मनाकर भाईचारे का संदेश देते हैं। 

घटिया मामू भांजा निवासी हिमायूं कुरैशी के वालिद मुबीन अहमद ने तकरीबन 40 साल पहले जगदीशपुरा निवासी चंदा देवी से राखी बंधवाई थी। हिमायूं को नहीं पता कि वालिद ने राखी बंधवाने की शुरुआत क्यों की, लेकिन तभी से बचपन से वो चंदा देवी और अब उनकी पुत्री सविता देवी से राखी बंधवाते हैं। 

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वर्षों से बांध रहीं राखी

मुस्लिम भाई के राखी बांधती हिंदू बहन - फोटो : अमर उजाला
चंदा देवी भी अपने भाइयों को राखी बाद में बांधती हैं। पहले वो टीका लेकर अपने धर्म भाइयों के घर पहुंचती हैं। हिमायूं के साथ ही उनके दो भाई भी राखी बंधवाने के बाद ही घर से निकलते हैं। 

नई बस्ती निवासी सामाजिक कार्यकर्ता शमी आगाई पिछले 10 साल से वत्सला प्रभाकर से राखी बंधवाते हैं। शमी बताते हैं कि वत्सला को वो पहले से जानते थे, लेकिन परिवार परामर्श केंद्र में दोनों काउंसलिंग करने लगे तो नजदीक से जानने का मौका मिला। 

रक्षाबंधन पर वत्सला ने राखी बांधकर धर्म भाई बनाया तो सिलसिला चल निकला। हालांकि इस दफा पद्मभूषण कवि गोपाल दास नीरज जी के निधन के कारण राखी फीकी रहेगी, लेकिन वह उनके घर जरूर जाएंगे। 

शमी ने बताया कि सुलहकुल की नगरी में मुस्लिम भाइयों के राखी बंधवाने का सिलसिला काफी पुराना है। शिक्षिका मनोरमा शर्मा भी नई बस्ती के पूर्व पार्षद मकसूद उल्ला खां को राखी बांधती थीं। 
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