फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पुराने पन्नों से: इंदिरा गांधी को जिन राजनारायण ने हराया, बाद में वो ही बन गए थे उनके प्रशंसक

Mon, 13 May 2024 01:06 PM IST
धीरेन्द्र सिंह संजीव सिंह, आगरा

सार

आपातकाल के बाद 1977 में जब चुनाव हुए तो रायबरेली से तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने चुनाव लड़ा था। यहां से उनके सामने जनता पार्टी ने राजनारायण को मैदान में हराया। परिणाम चौंकाने वाले आए। राजनरायण ने इंदिरा गांधी को हरा दिया। इसके बाद वे एक हीरो की तरह देश में चमके, लेकिन बाद वे खुद ही इंदिरा गांधी के प्रशंसक बन गए। 

 
विज्ञापन
पुराने पन्नों से - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

ये बात है वर्ष 1977 के आम चुनाव में जब इंदिरा गांधी को सत्ता से बाहर करने में अहम भूमिका निभाने वाले राजनारायण बाद में उनके प्रशंसक बन गए थे। लोकबंधु राजनारायण ने ही इंदिरा गांधी के चुनाव को अदालत में चुनौती दी थी। इंदिरा के खिलाफ हाईकोर्ट का फैसला आपातकाल का कारण बना। इमरजेंसी की ज्यादतियों के चलते इंदिरा को सत्ता से हाथ धोना पड़ा। कभी चरण सिंह को राम और खुद को हनुमान बताने वाले राजनारायण राजनीतिक कारणों से उनके खिलाफ हो गए और इंदिरा गांधी की तारीफ करने लगे थे।
विज्ञापन


अमर उजाला में 18 अगस्त 1979 में प्रकाशित समाचार के अनुसार राजनारायण ने कहा था कि वह और इंदिरा गांधी समाजवाद व धर्मनिरपेक्षता के समर्थक हैं। कभी चरण सिंह के घोर समर्थक राजनारायण ने उनसे अलग होकर जनता दल एस का गठन किया। केंद्र में चरण सिंह ने कांग्रेस के समर्थन से सरकार बना ली। राजनारायण ने इंदिरा गांधी की प्रशंसा करते हुए कहा कि वे दोनों ही सांप्रदायिकता और हिंदू आतंकवाद के विरोधी हैं। 

उनका कहना था कि इंदिरा गांधी अब काफी विनम्र हो गई हैं। पूर्व प्रधानमंत्री ने तानाशाही का तरीका छोड़ दिया है। कहा कि कांग्रेस को चरण सिंह सरकार का समर्थन नहीं करना चाहिए। इंदिरा गांधी की तारीफों के पुल बांधते हुए कहा कि उन्होंने लोकतंत्रीय होने की शिक्षा ली है। अब वह तानाशाही तरीका नहीं अपनाएंगी। उन्होंने इमरजेंसी लगाने से काफी कुछ सीखा है। अब वे गांव-गांव जाती हैं। किसानों से हाथ मिलाती हैं। अब जनता को स्वामी और अपने को सेवक मानने लगी हैं।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें