जिले में माध्यमिक शिक्षा का पूरा ढांचा निजी विद्यालयों के इर्द-गिर्द सिमटता नजर आ रहा है। सरकारी माध्यमिक विद्यालयों की संख्या महज 40 है, जबकि करीब 800 निजी माध्यमिक विद्यालय संचालित हो रहे हैं। इसके अलावा 109 सहायता प्राप्त (एडेड) विद्यालय और सीबीएसई व आईसीएसई बोर्ड से संबद्ध 179 स्कूल हैं। आंकड़े बताते हैं कि जिले में सबसे कम संख्या सरकारी विद्यालयों की है और शिक्षा व्यवस्था में निजी संस्थानों का दबदबा लगातार बढ़ रहा है।
जिले में एक सरकारी माध्यमिक विद्यालय के मुकाबले करीब 20 निजी विद्यालय हैं। ऐसे में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को निजी स्कूलों में प्रवेश लेना पड़ रहा है। कई ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी माध्यमिक विद्यालयों की पहुंच सीमित होने के कारण अभिभावकों के पास निजी विद्यालयों का विकल्प चुनने के अलावा दूसरा रास्ता नहीं बचता।
शिक्षा विशेषज्ञ प्रोग्रेसिव एसोसिएशन ऑफ पेरेंट्स संस्था संस्थापक मनोज शर्मा का कहना है कि पिछले कुछ वर्षों में निजी और केंद्रीय बोर्ड के विद्यालयों का तेजी से विस्तार हुआ है, जबकि सरकारी विद्यालयों की संख्या में अपेक्षित बढ़ोतरी नहीं हुई। बेहतर आधारभूत सुविधाएं, अंग्रेजी माध्यम, स्मार्ट क्लास और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी जैसी व्यवस्थाओं के कारण अभिभावक निजी विद्यालयों को प्राथमिकता दे रहे हैं।
हालांकि, निजी विद्यालयों की बढ़ती संख्या का आर्थिक बोझ भी अभिभावकों पर पड़ रहा है। फीस, परिवहन और अन्य खर्चों के कारण निम्न और मध्यम आय वर्ग के परिवारों को बच्चों की शिक्षा पर अधिक खर्च करना पड़ रहा है। शिक्षा के क्षेत्र से जुड़े लोग मानते हैं कि यदि नए सरकारी माध्यमिक विद्यालय खोले जाएं और मौजूदा विद्यालयों में सुविधाओं का विस्तार किया जाए तो विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और सस्ती शिक्षा का बेहतर विकल्प मिल सकेगा।
जिले में माध्यमिक विद्यालयों की स्थिति
सरकारी माध्यमिक विद्यालय : 40
सहायता प्राप्त (एडेड) विद्यालय : 109
सीबीएसई व आईसीएसई स्कूल : 179
निजी माध्यमिक विद्यालय : करीब 800
एक और स्कूल को इंटर करने जा रहे
डीआईओएस रविंद्र पाल तोमर ने बताया कि जल्दी राजकीय हाईस्कूल नौनी खैरागढ़ को में 9वीं व 10वीं शुरू करने जा रहे हैं इसके अलावा हम एक और स्कूल को इंटर कॉलेज करने जा रहे हैं।