प्रार्थनापत्र देने के बाद भी भवन ध्वस्त नहीं किए जा रहे
निष्प्रयोज्य जर्जर स्कूल भवनों को ध्वस्त किए जाने के संबंध में प्रधानाध्यापकों की ओर से प्रार्थनापत्र दिए जाने के बाद भी विभाग की ओर से उसे ध्वस्त नहीं कराया जा रहा है। बारिश से ऐसे भवन और खतरनाक हो चुके हैं। सोमवार से स्कूल खुले जाएंगे। यदि विद्यार्थी खेलते-कूदते इन भवनों के पहुंच जाते हैं तो दुर्घटना होने का डर है। तत्काल ऐसे भवनों को गिराया जाना चाहिए। इन स्थानों पर खेल के मैदान बनाए जाने चाहिए।
- राजीव वर्मा, जिलामंत्री, यूटा
शासनादेश का भी पालन नहीं किया जा रहा
‘जिले में करीब 500 स्कूलों के प्रांगण में जर्जर भवन खड़े हैं या फिर जिसमें पढ़ाई कराई जा रही है, वही स्कूल भवन जर्जर है। शासन दो वर्ष से ऐसे भवनों को चिह्नित करके ध्वस्तीकरण की कार्रवाई करने का आदेश दे रहा है। विभाग की ओर से शासनादेश का पालन नहीं किया जा रहा है। भवनों के संबंध में जल्द कोई निर्णय नहीं लिया गया तो भविष्य में गंभीर हादसा हो सकता है।’
- बृजेश दीक्षित, जिलामंत्री, प्राथमिक शिक्षक संघ
15 से 20 दिन में निलामी की प्रक्रिया पूरी कराई जाएगी
‘विभाग की ओर से करीब 500 जर्जर स्कूल भवनों की रिपोर्ट शासन को भेजी गई थी। इसमें विभिन्न विभागों की उच्च स्तरीय जांच समिति बनाई गई। उसने सत्यापन के बाद करीब 200 ऐसे स्कूलों की सूची विभाग को दी है, जिनको ध्वस्त कराया जाना है। 15 से 20 दिन में नीलामी की प्रक्रिया पूरी कर जर्जर भवनों को ध्वस्त कराना शुरू कर दिया जाएगा। कुछ भवन ध्वस्त भी हुए हैं।’
- ब्रजराज सिंह, प्रभारी बेसिक शिक्षा अधिकारी
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