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पांच साल बाद आलू किसानों की 'चांदी', 2200 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहा भाव

Thu, 23 Jul 2020 01:09 PM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • 2.59: लाख किसान हैं जिले में
  • 70: हजार हेक्टेयर जमीन पर हुई आलू की खेती
  • 270: शीतगृह हैं जिले में
  • 4.20: करोड़ पैकेट हुए आलू की पैदावार
  • 2.60: करोड़ पैकेट आलू के अभी शीतगृह में
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Potato - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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आलू किसानों की इस बार चांदी है। आलू का भाव 2000 से 2200 रुपये प्रति क्विंटल तक मिल रहा है। लॉकडाउन के मुकाबले यह डेढ़ गुना है। इस बार बाहर से आलू न आ पाने के कारण यहां कीमतें चढ़ी हैं। फुटकर में तो 30 रुपये किलो तक हैं। आलू की खपत भी इस बार ज्यादा है, क्योंकि शनिवार और रविवार के लॉकडाउन के कारण लोग इसे स्टोर कर रहे हैं। एक वजह यह भी है कि इस बार आलू की पैदावार कम है।
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जिले में 72 हजार हेक्टेयर जमीन पर आलू की बुवाई हुई। आलू के 50 किलो के सवा चार करोड़ पैकट शीतगृहों में जमा हुए। कोरोना वायरस के प्रकोप से पहले आलू प्रति पैकेट 600 से 700 रुपये के भाव बिक रहे थे। लॉकडाउन खुलने के बाद इनकी कीमत लगातार बढ़ती गई और अब प्रति पैकेट 1000 से 1100 रुपये का भाव मिल रहा है।

लागत की बात करें तो यह प्रति पैकेट 500 से 600 रुपये आती है। इससे पहले 2014 में किसानों को आलू का यह भाव मिला था। अभी शीतगृहों में 60 फीसदी आलू जमा है। किसानों को अभी और कीमत बढ़ने की उम्मीद है। आगरा कोल्डस्टोरेज ओनर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सुदर्शन सिंघल ने बताया कि 30 से 40 फीसदी आलू की बिक्री हो गई है, आलू की किसानों को अच्छी कीमत मिली है। इस बार पैदावार कम है, मांग ज्यादा। बाहर से आलू बहुत कम आया है। इस कारण रेट अच्छे हैं। 
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पांच साल से नहीं निकल रही थी लागत
पांच साल से आलू की लागत तक नहीं निकल पा रही थी, इनमें दो साल तो आलू का भाड़ा तक नहीं निकला, ऐसे में आलू शीतगृह में ही सड़ गए। - राजवीर लवानियां, जिलाध्यक्ष भाकियू 

सरकार आलू प्रोसेसिंग यूनिट और खोल दे तो इससे आलू आधारित व्यापार को बढ़ावा मिलेगा। अच्छी कीमत मिलेगी और किसानों को नुकसान नहीं होगा। - धर्मवीर चौधरी, आलू किसान

आलू में लगातार नुकसान होने से किसानों पर कर्जा तक हो गया था। इस बार अच्छी कीमत मिली है, इससे किसानों को कुछ राहत मिली है। - प्रदीप शर्मा, आलू किसान

5 हजार हेक्टेयर कम हुई खेती
पिछले साल 75 हजार हेक्टेयर के मुकाबले इस बार 70 हजार हेक्टेयर में आलू की खेती हुई। पैदावार भी कम हुई है, इसके चलते किसानों को आलू की अच्छी कीमत मिली है। - कौशल कुमार नीरज, उप निदेशक उद्यान विभाग

सब्जी किसानों को नुकसान, लागत भी नहीं निकली
सब्जी-फल उगाने वाले किसानों की हालत अनलॉक में भी सुधरी नहीं है। सब्जी की फसल और फलों की बागवानी करने वाले किसानों की लागत तक नहीं निकल रही। सड़ने से बचाने के लिए मजबूरी में जो भाव किसानों को मिल रहा हे वे उसमें ही बेचने को मजबूर हैं।
 
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मजबूरी में कम दाम में बेच रहे
लॉकडाउन में सब्जी खेतों में ही सड़ गई। अब सब्जी तोड़कर मंडी लेकर जाते हैं, तो यहां बेहद कम दाम मिलते हैं। सब्जी सड़ने के डर से जो भाव मिलता है, उसी में बेचना मजबूरी है। - जितेंद्र कुमार, बरौली अहीर

फाल्सा, आम के वाजिब दाम नहीं मिले। नीबू की भी कीमत नहीं मिल पा रही। लागत तक नहीं मिल रही है। लोगों को सस्ती सब्जी-फल नहीं मिल पा रहे, बिचौलिए कमीशन खा रहे हैं। - सतीश सिकरवार, किरावली
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