सब्जियों के राजा आलू की कीमत एकाएक धड़ाम हो गई है। सप्ताह भर में यह कमी आई है। इससे किसान परेशान हैं। दरअसल, आगरा के 400 से ज्यादा शीतगृहों में अब भी 40 फीसदी से ज्यादा आलू के पैकेट भरे रखे हैं। जिले में 5 करोड़ पैकेट आलू का भंडारण किया गया था। अब भी करीब 2 करोड़ पैकेट का भंडारण होने के कारण आलू की कीमतों में गिरावट की आशंका है। निजी कंपनी ने हाल में ही आलू को खुले बाजार में बेहद कम कीमत पर बेच दिया, जिससे आगरा समेत आसपास के जिलों के आलू किसानों की चिंता बढ़ गई है।
20 फीसदी आलू बुवाई में होगा इस्तेमाल
आलू उत्पादकों की चिंता है कि 30 नवंबर तक ही वह कोल्ड स्टोर में आलू रख सकते हैं। दिवाली से पंजाब का आलू बाजार में आ जाएगा। ऐसे में आगरा का आलू अगर शीतगृह में रखा रह गया तो बीते सालों की तरह कीमत कम होने पर फेंकना पड़ सकता है। इस समय आलू का दाम वैरायटी के मुताबिक 800 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल है।
शीतगृह में रखे आलू बेच दें
आलू उत्पादक समिति के किसान नेता पुष्पेंद्र जैन ने बताया कि बारिश के कारण नए आलू की बुवाई में समय है, इसलिए शीतगृह (कोल्ड स्टोर) में रखे आलू को किसान बेच दें। बुवाई में बीज के रूप में आलू बचाकर बाकी आलू की बिक्री करेंगे तो नुकसान नहीं होगा।
फेंकने की आ जाएगी नौबत
फेडरेशन ऑफ कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के अध्यक्ष राजेश गोयल ने बताया कि पंजाब और अन्य उत्तरी राज्यों में आलू की फसल तैयार हो रही है जो दिवाली पर आ जाएगी। ऐसे में आलू को फेंकने की नौबत न आए, इसलिए किसान आलू पैकेट निकाल लें। एक निजी कंपनी के सस्ता आलू बेचने के कारण हाल में आलू की कीमतें गिरी हैं।
परंपरागत नहीं, चिप्स वाले आलू की मांग
फेडरेशन आफ कोल्ड स्टोरेज एसोसिएशन के पदाधिकारी अजय गुप्ता ने बताया कि उनके कोल्ड स्टोर में देश की नामी चिप्स बनाने वाली कंपनी ने आलू का भंडारण किया है। उनके फूड प्रोसेसिंग प्लांट के लिए गुजरात से आलू आ रहा है, पर खंदौली और आगरा के अन्य ब्लॉक के किसान उस प्रजाति का आलू नहीं उगाते। केवल 20 फीसदी आलू ही आगरा दे पा रहा है। आगरा के किसान चाहेंगे तो बकाया 80 फीसदी आलू की मांग यहीं से पूरी हो सकती है, गुजरात से आलू लेने की जरूरत नहीं पड़ेगी, लेकिन किसान पुराने बीजों का मोह नहीं छोड़ रहे।