एटा: संरक्षित टीले पर बनाया मंदिर
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बिल्सड़ में एतिहासिक महत्व के अवशेष मिले हैं, लेकिन बिल्सड़ पुवायां में इन पुरावशेषों पर आबादी का अतिक्रमण हावी हो गया है। एएसआई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) द्वारा संरक्षित होने के बावजूद यहां लगातार अवैध कब्जे होते रहे और कई मकान बन गए। अब इनको हटवाने की कवायद शुरू की गई है।
गुप्त कालीन अवशेष
आजादी से पहले 1928 में बिल्सड़ पट्टी के गुप्तकालीन अवशेष और बिल्सड़ पुवायां का गढ़ी बाबा टीला को संरक्षित किया था, लेकिन एएसआई और स्थानीय प्रशासन द्वारा इनके संरक्षण पर विशेष ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में यहां लोग मनमाने ढंग से खोदाई कर कई महत्वपूर्ण शिलाएं आदि ले गए। जबकि बिल्सड़ पुवायां में संरक्षित 200 वर्ग मीटर के दायरे में कई मकान खड़े कर लिए गए। इस क्षेत्र में ही करीब आधा गांव बस गया। हाल ही में एएसआई ने बिल्सड़ पट्टी में उत्खनन कराया तो 5वीं शताब्दी के गुप्तकालीन मंदिर की सीढ़ियां दिखाई दीं। साथ ही शंख लिपि का एक शिलालेख मिला, जो कि एतिहासिक दृष्टिकोण से काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इसके साथ ही एएसआई की टीम ने यहां डेरा डाल दिया है। इस इलाके में तो बाउंड्रीवॉल का काम पूरा कराया जा चुका है, लेकिन बिल्सड़ पुवायां के हालात खराब हैं। अवैध कब्जों को चिह्नित कराने के लिए प्रशासन ने शनिवार से यहां पैमाइश शुरू करा दी है।
बिल्सड़ के शुरुआती उत्खनन में महत्वपूर्ण अवशेष मिले हैं। अभी काफी उत्खनन कराया जाना है। टीले के आसपास अतिक्रमण कर निर्माण करा लिए गए हैं, जो कार्य में बाधक हैं।
-अंकित नामदेव, संरक्षण सहायक
बिल्सड़ में एएसआई द्वारा जो क्षेत्र संरक्षित किया गया है, उसके चिह्नांकन के लिए पैमाइश शुरू करा दी गई है, जो भी अवैध कब्जे पाए जाएंगे, उनका ध्वस्तीकरण कराया जाएगा।
- एसपी वर्मा, एसडीएम अलीगंज
एटा: बिलसड़ में मिले पांचवीं शताब्दी के मंदिर के अवशेष, गुप्तकालीन सीढ़ियां और शिलालेख