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Cyber Fraud: पुलिस को नहीं मिल रहे झारखंड व मेवात के साइबर ठग, हर दिन शिकार हो रहे लोग

Wed, 29 Nov 2023 10:01 AM IST
धीरेन्द्र सिंह आशीष शर्मा, आगरा

सार

कभी रिश्तेदार तो कभी बैंक अधिकारी बनकर, साइबर अपराधी हर रोज लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। पुलिस को इन तक पहुंचने में कामयाबी नहीं मिल पा रही है। 
 
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cyber fraud new - फोटो : istock
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विस्तार
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 कभी ओटीपी पूछकर तो कभी लिंक भेजकर। नौकरी और निवेश का झांसा। हेल्पलाइन नंबर ही नहीं, टावर लगाने व बिजली बिल जमा करने के नाम पर साइबर अपराधी लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। सालभर में 100 से ज्यादा मुकदमे पुलिस ने दर्ज किए हैं। गिरफ्तारी न के बराबर है। झारखंड और मेवात के साइबर ठगों को पुलिस ढूंढ ही नहीं पा रही है।

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ये हैं प्रमुख घटनाएं
- लोहामंडी में दो सगे भाई फईम और कामरान से 1.50 लाख रुपये की धोखाधड़ी की गई। निवेश करने पर घर बैठे अच्छी कमाई का लालच देकर ठग लिया गया। केस दर्ज हुआ, गिरफ्तारी नहीं हो सकी।
- 5 मार्च को वायु विहार निवासी देवेंद्र सिंह चाहर के साथ साइबर धोखाधड़ी की गई। काॅल करके निवेश करने पर मुनाफे का झांसा दिया गया। तीन लाख रुपये ले लिए गए। इसके बाद आरोपी ने मोबाइल नंबर बंद कर लिए।
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- 27 अक्तूबर 2022 को न्यू जनता काॅलोनी निवासी बबिता के मोबाइल पर मैसेज भेजा गया। घर बैठे कार्य करने पर कमाई का लालच देकर दो लाख से अधिक ठग लिए गए। केस में एक साल बाद केस दर्ज हुआ।
- मई में सेवला जाट के रहने वाले अजय पाल के साथ टावर लगवाने के नाम पर धोखाधड़ी की गई। काॅल करके खाते में 42170 रुपये निकाल लिए गए। पुलिस ने पांच महीने बाद केस लिखा।
- अगस्त में सदर निवासी सोनम जैन के ई-कॉमर्स कंपनी से रकम दिलाने के नाम पर ठगी हुई। लिंक भेजकर खाते से 1.13 लाख रुपये ले लिए गए। इसके बावजूद रकम मांगी।
- सदर क्षेत्र के युवक को वीडियो कॉल किया गया। न्यूड वीडियो बना ली गई। दिल्ली का पुलिस अधिकारी बनकर कॉल करके धमकाया गया। 65,500 रुपये ठग लिए गए।

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वीडियो कॉल से शोषण
पुलिस के मुताबिक, हरियाणा के मेवात और राजस्थान के भरतपुर में सक्रिय साइबर ठग तीन तरीके से लोगों को अपना शिकार बना रहे हैं। वह व्हाट्सएप-फेसबुक मैसेंजर पर वीडियो कॉल करते हैं। लोगों को सेक्सटॉर्सन का शिकार बनाकर शोषण करते हैं। वीडियो रिकॉर्ड होने पर पुलिस अधिकारी बनकर काॅल करके कार्रवाई का डर दिखाकर रकम ऐंठते हैं।

रिश्तेदार बनकर ठगी
इसी तरह कभी रिश्तेदार बनकर काल करते हैं। रकम जमा करा लेते हैं। इसी तरह ओएलएक्स पर विज्ञापन देखकर और देकर ठगते हैं। विज्ञापन देखकर कॉल करने वाले से रकम जमा करा लेते हैं। सामान नहीं भेजते हैं। इसी तरह कई बार विज्ञापन देने वाले को कॉल करके रकम भेजने का झांसा देकर खुद अपने खाते में रकम ट्रांसफर कर लेते हैं।

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बैंक अधिकारी बनकर कॉल
वहीं पश्चिम बंगाल और झारखंड के गैंग बिजली बिल जमा कराने, केवाईसी अपडेट और हेल्पलाइन नंबर, पेंशन, बैंक अधिकारी बनकर कॉल करते हैं। रकम जमा कराने के बाद खाते और मोबाइल नंबर बंद कर लेते हैं।

धोखाधड़ी करने वाले भी नहीं पकड़े
आगरा और फिरोजाबाद में तैनात पुलिसकर्मी, फालोअर से दो साल पहले धोखाधड़ी की गई। पेंशन विभाग का अधिकारी बनकर जानकारी ली गई। नेट बैंकिंग चालू करने के बाद खाते से लाखों निकाल लिए गए। पुलिस ने मुकदमे भी दर्ज किए। मगर, आरोपी अब तक नहीं पकड़े। यह भी पता नहीं चल सका कि आखिर डाटा कहां से लीक किया गया।


टीम बनाकर करेंगे प्रयास
डीसीपी सिटी सूरज राय ने बताया कि साइबर सेल लगातार कार्रवाई कर रही है। अवैध बेटिंग वेबसाइट और एप चलाने वालों पर शिकंजा कसा गया। हैदराबाद और मेवात से अपराधियों को पकड़ा गया। साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत करने पर पैसा भी वापस कराया जा रहा है। जिन मामलों में अभी अपराधी नहीं पकड़े गए हैं, उनमें टीम बनाकर गिरफ्तारी के प्रयास कराए जाएंगे।
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