‘जन्म के अंगना अलग-अलग हैं, मरण का मरघट एक।’ जीवन का सच हो या देश की चिंता, उनकी लेखनी ने समाज को संदेश दिया। छंद-व्यंग्य के माध्यम से उन्होंने समाज को नई दिशा देने की कोशिश की। जिले ने बुधवार को एक मानस पुत्र को खो दिया।
पूर्व राज्यमंत्री और राष्ट्रीय कवि आत्मप्रकाश शुक्ल के निधन से जिले में शोक की लहर दौड़ गई। कानपुर स्थित आवास पर मंगलवार देर रात उन्होंने अंतिम सांस लीं। उनके निधन की खबर मिलते ही उनके मूल आवास अलीगंज में शुभचिंतकों का तांता लग गया। बुधवार को पार्थिव शरीर पहुंचने के बाद अंतिम दर्शन के लिए लोग उमड़ पड़े। देर शाम राष्ट्रीय कवि का अंतिम संस्कार किया गया।
अलीगंज स्थित डीएवी इंटर कालेज में चार दशक तक अंग्रेजी के प्रवक्ता और प्रधानाचार्य रहे आत्मप्रकाश शुक्ल का जन्म वर्ष 1939 में कायमगंज के एक छोटे से गांव में हुआ। शुरू से हिंदी साहित्य में रुचि रही और छात्र जीवन से कविता की धुन सवार हो गई। 1952 में जहान नगर के एक किसान परिवार में शादी होने के बाद वह अलीगंज में रहने लगे।