एक साल पहले ब्रज तीर्थ विकास परिषद के सुझाव पर वन विभाग ने गोवर्धन पर्वत के पास प्रयोग के तौर पर पांच हेक्टेयर जमीन से विलायती बबूल को हटाकर देसी प्रजाति के चौड़ी पत्तियों वाले पौधे लगाने का प्रोजेक्ट बनाया था, लेकिन इसके लिए शासन से अनुमति नही मिली।
गोवर्धन पर्वत क्षेत्र दरअसल, ताज ट्रिपेजियम जोन का भी हिस्सा है। ऐसे में यहां किसी भी पेड़ को काटने के लिए सुप्रीम कोर्ट से अनुमति लेनी होगी। इसके बाद नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से गोवर्धन पर्वत पर ऐसे प्रयोग की अनुमति चाहिए होगी। गोवर्धन पर्वत की ज्यादातर याचिकाएं एनजीटी में ही हैं।
'गोवर्धन पर्वत क्षेत्र में धौ, तमाल, पीलू, कदंब आदि पौधों के जरिए प्राचीन रूप को साकार करने का प्रयास हो रहा है। देसी और ब्रज में लगे पुराने पौधों की प्रजातियों को ही लगाया जा रहा है ताकि यह क्षेत्र हरा भरा रहे। परिक्रमा मार्ग पर खुशबूदार फूलों को लगाया जा रहा है।'- अभय कुमार सिंह, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक