न बड़ी जनसभा, न वरिष्ठ नेताओं के भाषण। न भीड़ जुटाने की चुनौती, न टेंट लगाने की टेंशन। उत्तर विधानसभा सीट पर उपचुनाव में प्रचार का पूरा दारोमदार स्थानीय नेताओं के कंधों पर ही रहेगा। वही स्टार प्रचारक होंगे। इन्हीं के कंधों पर उपचुनाव के प्रचार का भार होगा।
समाज और मोहल्लों की बैठकें कर अपने प्रत्याशी के लिए समर्थन जुटाने का प्रयास करेंगे। उत्तर विधानसभा सीट का उपचुनाव लोकसभा चुनाव के बीच में आ जाने के कारण सभी दलों के वरिष्ठ नेता अन्य जनपदों में व्यस्त हैं। लोकसभा प्रत्याशियों के लिए ताबड़तोड़ जनसभाएं कर रहे हैं। एक-एक दिन में कई सभाएं कर रहे हैं।
राजनीतिक दलों के दिग्गजों के पास समय का अभाव है। ऐसे में उपचुनाव में प्रचार की जिम्मेदारी स्थानीय नेताओं के कंधों पर ही आ गई है। हालांकि कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष सहित पश्चिमी यूपी प्रभारी ज्योतिरादित्य सिंधिया को लाने की तैयारी में है।