पाइल्स (बवासीर), हर दूसरा शख्स इससे पीड़ित है। संकोच ऐसा, असहनीय दर्द के बावजूद लोग डाक्टरों तक नहीं पहुंचते। यही संकोच मर्ज को ऑपरेशन की स्थिति तक पहुंचाता है। लेप्रोस्कॉपिक सर्जन डा. सुनील शर्मा बताते हैं कि 45-50 फीसदी लोगों को ये बीमारी है।
50 साल की उम्र बाद होने वाली बीमारी अब 20-30 साल की उम्र में भी हो रही है। ऐसे करीब 25 फीसदी रहते हैं। शौच के वक्त रक्त आए तो छिपाएं नहीं, इस चरण में दवाओं से मर्ज ठीक हो जाता है।
अधिक खून बहना, मस्से बाहर आने पर ऑपरेशन ही विकल्प बचता है। इसकी बड़ी वजह खानपान में मांसाहार, चिकनाईयुक्त भोजन, तंबाकू-शराब है। देर रात तक जागना, खाने का समय गड़बड़ाना, बैठे रहने का कार्य करने वाले जल्द चपेट में आते हैं। तनाव भी कारण बनता जा रहा है।