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बाजार से गायब हुआ पद्मावती की वीरगाथा का साहित्य, फिल्म के विवाद ने बढ़ाई डिमांड

Sat, 18 Nov 2017 03:09 PM IST
पुनीत शर्मा/अमर उजाला मथुरा
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बुक - फोटो : अमर उजाला
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बॉलीवुड की फिल्म पद्मावती को लेकर देश भर में हो रहे विरोध के बीच चित्तौड़ की रानी पद्मावती की वीरगाथाओं से जुड़े साहित्य की रिकार्ड बिक्री हुई है। पिछले करीब दस दिनों से बुक स्टाल पर पद्मावती से जुड़ा साहित्य मिल नहीं पा रहा है। गोरा बादल और पद्मावती की डिमांड सबसे ज्यादा है।
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संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती को लेकर देश भर में विरोध हो रहा है। ब्रज क्षेत्र में भी बड़ा आंदोलन चल रहा है। इन आंदोलनों के बीच पद्मावती की वीरगाथाओं से जुड़े साहित्य की मांग तेजी के साथ बढ़ी है। 

लोग नेट पर तो सर्च करके सामग्री जुटा ही रहे हैं बुक स्टाल पर भी पद्मावती से जुड़े साहित्य को लेने के लिए लोग पहुंच रहे हैं। मथुरा जंक्शन पर तीन बड़े बुक स्टाल हैं लेकिन किसी में भी इस समय इससे संबंधित साहित्य नहीं मिल रहा है। 
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स्टॉक खाली

BOOKS
रेलवे स्टेशन पर बुक स्टाल चलाने वाले प्रशांत पांडेय ने बताया कि फिलहाल पद्मावती से जुड़ा कोई साहित्य नहीं है। जो स्टाक में था उसकी बिक्री हो चुकी है। 

आगरा रोड पर बुक डिपो चलाने वाले विनीत कुमार ने बताया कि पिछले सप्ताह भर से तमाम लोग रानी की वीरगाथाओं की किताबों के लिए आ रहे हैं लेकिन अब सामग्री बची ही नहीं है। वृंदावन के ग्रंथालय में भी पद्मावती से संबंधित कोई साहित्य नहीं रह गया है। इतिहास से जुड़ी जो किताबें थीं उनकी बिक्री हो चुकी है। 
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ये हैं प्रसिद्ध पाठ्यपुस्तक

इतिहासकार लक्ष्मीनारायण तिवारी का कहना है कि छोटा साका और बड़ा साका काव्य के रूप में आता है जिसमें पूरी वीरगाथा है। श्याम नारायण पांडेय का काव्य जौहर पसंद किया जाता है। सभी का कहना है कि रानी पद्मावती के साहस और बलिदान की गौरवगाथा इतिहास में सबसे ऊपर है। 

तोता हीरामणि का किस्सा भी खूब पसंद किया जाता है। इतिहास के सेवानिवृत्त प्रवक्ता दामोदर सिंह का कहना है कि भारत के इतिहास नाम से जो ग्रंथ है उसमें भी रानी पद्मावती की वीरगाथा को दर्शाया गया है। पूरा विवरण इसमें है।
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