इस हिसाब से आगरा के 9.50 लाख बच्चों (0-10 वर्ष) के लिए 950 विशेषज्ञ चिकित्सक होने चाहिए, लेकिन यहां करीब एक चौथाई ही उपलब्ध हैं। तीसरी लहर की तैयारियां तेजी से करनी चाहिए, नहीं तो दूसरी लहर की तरह अव्यवस्थाएं फैल जाएंगी। निजी चिकित्सक भी इसमें पूरा सहयोग देने के लिए तैयार हैं।
एसएन में 50 पीआईसीयू, 50 आइसोलेशन बेड
संक्रमित बच्चों का इलाज बाल रोग विभाग में बने आइसोलेशन वार्ड में किया जाएगा। यहां पर 50 बेड का आइसोलेशन वार्ड और 50 बेड बाल सघन चिकित्सा कक्ष (पीआईसीयू) के लिए तय किए गए हैं।
पीआईसीयू के लिए वेंटिलेटर, बाइपैप मशीन नहीं हैं। इन जीवनरक्षक उपकरणों के अभाव में गंभीर बच्चों का इलाज नहीं हो पाएगा। प्रशासन के निर्देश पर 20 जून तक पूरी तरह से आइसोलेशन वार्ड तैयार करना है, लेकिन मशीन न होने से तैयारियां अधूरी हैं।
नॉन कोविड अस्पताल में 8 वेंटिलेटर
बच्चों के इलाज में उपयोग होने वाले वेंटिलेटर वयस्क वालों से भिन्न होते हैं। अभी एसएन के पास बच्चों के आठ वेंटिलेटर हैं, जो नॉन कोविड बाल रोग विभाग में लगे हैं। वहीं एसएन मेडिकल कॉलेज में 39 बाल रोग विशेषज्ञ ही हैं। इसमें आठ वरिष्ठ चिकित्सक, 30 जूनियर डॉक्टर और एक सीनियर रेजीडेंट हैं। ऐसे में अन्य मर्ज के चिकित्सकों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा।
आगरा पीडियाट्रिक्स एसोसिएशन के अध्यक्ष डॉ. आरएन शर्मा ने कहा कि तीसरी लहर से आशंकित होने की जरूरत नहीं। अभी तक की स्टडी में बच्चे संक्रमित जरूर हुए, लेकिन स्थिति नाजुक नहीं रही है। तीसरी लहर आएगी तो वयस्क और बच्चे दोनों के संक्रमित होने की आशंका है। ऐसे में बच्चों की सुरक्षा के लिए परिजन टीकाकरण करवा लें। क्योंकि बच्चों को परिजनों से ही ज्यादा खतरा है।
आगरा पीडियाट्रिक्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष डॉ. अरुण जैन ने बताया कि तीसरी लहर से निपटने के लिए पहले से ही बेहतर व्यवस्थाएं करनी होंगी। निजी अस्पतालों में करीब 200 पीआईसीयू बेड हैं। ऐसे में अलग-अलग अस्पतालों में सेटअप करने के बजाए चार-पांच अस्पतालों में ही 400 से 500 बेड की व्यवस्था की जाए। आपात स्थिति के लिए पैरामेडिकल स्टाफ और अन्य मर्ज के चिकित्सकों को भी बच्चों की देखरेख के लिए प्रशिक्षण दिया जाए