आगरा में नकली, सरकारी और एक्सपायर दवाओं के बड़े नेटवर्क का खुलासा होने के बाद एफएसडीए ने 58 थोक दवा लाइसेंस निरस्त कर नए लाइसेंस जारी करने पर रोक लगा दी है। अब जिले के सभी थोक दवा लाइसेंसों का सत्यापन कर कारोबार और गोदामों की विस्तृत जांच की जा रही है।
निरस्त लाइसेंस से सरकारी, सैंपल, नकली और एक्सपायर दवाओं की तस्करी की जा रही है। आगरा में बीते दिनों छापे में ऐसे ही फर्म पकड़ी गईं। इस पर दवाओं के 58 थोक लाइसेंस निरस्त कर दिए। अब खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन आयुक्त ने थोक लाइसेंस पर रोक लगा दी है। सभी थोक लाइसेंस का सत्यापन भी हो रहा है।
जिले में करीब 8500 मेडिकल स्टोर को लाइसेंस दिए हुए हैं। इनमें से तीन हजार थोक दवा के लाइसेंस हैं। बीते दिनों एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब के नेतृत्व में छापा मारकर 3.73 करोड़ रुपये की नकली, सरकारी और सैंपल दवाएं जब्त की हैं। चार गोदामों पर सील लगी है। 58 फर्म के लाइसेंस निरस्त कर दिए हैं। अब सभी दवाओं के थोक लाइसेंस का सत्यापन किया जा रहा है। एफएसडीए आयुक्त डॉ. रोशन जैकब ने बताया कि जांच के दौरान कई थोक दवा विक्रय के लाइसेंस निरस्त किए गए। यह लोग दोबारा से अपने सगे-संबंधियों के नाम से लाइसेंस बनवा लेते हैं। इसलिए थोक के नए लाइसेंस पर रोक लगा दी गई है।
थोक दवा लाइसेंस के सत्यापन कर बना रहे रिपोर्ट
सहायक आयुक्त औषधि अतुल उपाध्याय ने बताया कि जिले के सभी थोक लाइसेंस का सत्यापन कराया जा रहा है। इसमें फर्म का नाम, लाइसेंस धारक का नाम, पता, फोन नंबर, जीएसटी नंबर, सालाना टर्नओवर, खरीद-बिक्री, गोदाम की संख्या समेत अन्य जानकारी जुटाई जा रही है। सभी से अपनी फर्म पर बोर्ड में ये जानकारी दर्ज करने को भी निर्देशित किया है।