आजादी मिलने के बाद शहर में बड़े पैमाने पर नजूल भूमि का फर्जीवाड़ा हुआ। जोंस मिल की जांच के दौरान 2020 में प्रशासनिक रिपोर्ट में नजूल भूमि का फर्जीवाड़ा सामने आया था। कलेक्ट्रेट में तैनात तत्कालीन नजूल मोर्हरिर गिर्राज को धन लोलुपता के आरोप में निलंबित किया गया। बिल्डर व भूमाफिया को लाभ पहुंचाने के लिए नजूल भूमि की एनओसी दी गई थी। तत्कालीन एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव ने तब नजूल अभिलेखों का राजस्व अभिलेखों से मिलान कराने, स्थलीय और भौतिक सत्यापन कराने की संस्तुति की थी। साथ ही अक्षांश व देशांतर चिह्नांकन कराने और भूमि की सूची बनाने के लिए कहा था।
भूमाफिया ने खुर्दबुर्द की 107 करोड़ की भूमि
मौजा घटवासन में भूमाफिया ने 107 करोड़ रुपये की नजूल कूटरचित दस्तावेजों से खुर्दबुर्द कर दी। पांच साल से इस मामले की फाइल आर्थिक अपराध शाखा में जांच के नाम पर धूल फांक रही है। बालगूंज में खसरा संख्या 626 में 6.16 बीघा भूमि थी। जिसमें 4 बीघा 6 विस्वा नजूल और 1 बीघा 12 विस्वा निजी भूमि थी। 1957 से इस भूमि पर कब्जा था। जिसे जालसाजों ने कूटरचित दस्तावेजों से बेच दिया।
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