अलाव सेंककर सर्दी दूर भगाने का प्रयास करते लोग।
उत्तर प्रदेश के आगरा में पारा कम होने से स्वस्थ लोगों का शरीर भी जवाब दे रहा है। शरीर का ताप ठंडा पड़ रहा है। इससे मांसपेशियों में दर्द, छाती में जकड़न, बुखार-खांसी और बुखार की परेशानी हो रही है। एसएन मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में 30 फीसदी ऐसे ही मरीज हैं।
मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रभात अग्रवाल ने बताया कि ओपीडी में रोजाना औसतन 450 मरीज आ रहे हैं। मरीजों ने बताया कि शुरूआत में हाथ-पैर, पीठ और मांसपेशियों में दर्द हुआ। थकान, आलस और भूख भी कम लगने लगी। एक-दो दिन बाद खांसी-जुकाम और बुखार भी आ गया। पूछताछ में पता चला कि दुपहिया वाहन चलाते वक्त कान-हाथ खुले थे।
बेहतर ढंग से गर्म कपड़े भी नहीं पहने थे। सर्दी लगने के कारण लैक्टिक एसिड मांसपेशियों में जमा हो गया, जिससे ये परेशानी पनपीं। इनका जब तापमान मापा तो 37.6 डिग्री सेल्सियस से कम मिला। ऐसे मरीज हाइपोथर्मिया के शिकार हुए। इनको दवा देने के साथ शरीर को गर्म रखने पर जोर दिया। गंभीर हाल के मरीजों में लकवा, ब्रेन हेमरेज का भी खतरा रहा।
बच्चों को कंपकंपी तो हाइपोथर्मिया की दस्तक
एसएन मेडिकल कॉलेज के बाल रोग विभागाध्यक्ष डॉ. नीरज यादव ने बताया कि बच्चों को कंपकंपी हो रही है तो वह हाइपोथर्मिया की दस्तक है। कंपकंपी के जरिये शरीर जरूरी ताप उत्पन्न करता है। लेकिन नवजात में ये सिस्टम विकसित नहीं हो पाता है। ऐसे में बच्चों के सर्दी लगने से उसको सांस लेने में परेशानी होने लगती है। इससे रक्त का संचार प्रभावित होता है। कई बार शिशु की जान पर बन आती है।
इन बातों का रखें ख्याल-
- बाहर जाते वक्त सिर, कान और पैरों को ढककर रखें।
- धुंध-कोहरा होने पर बाहर टहलने से बचें, धूप खिलने पर ही जाएं।
- बच्चों को मोजे, टोपी, दस्ताने पहनाएं, खुले पैर न चलने दें। जल्दी बिस्तर से बाहर न जाने दें।
- शिशु ठंडा पड़ने पर मां-परिवारीजन छाती से चिपकाकर रखें, सुधार न हो तो डॉक्टर को दिखाएं।
- प्रोटीन युक्त भोजन करें, गुनगुना दूध पीएं। अखरोट, बादाम समेत अन्य ड्राई फ्रूट्स खाएं।
- गुनगुना पानी पीएं, सूप पीएं। भोजन में दाल, चपाती, बथुआ, पालक, मैथी समेत हरी सब्जी खाएं।