सीसीटीवी से मिला अहम सुराग
वहीं सीसीटीवी कैमरे में राजवीर कैद हो गया था। पुलिस ने 4 घंटे की सीसीटीवी फुटेज देखी थी। इसमें पता चला कि वह घटना के बाद राजवीर अधिकारी के घर में आया था। उसने गमछे से अपने हाथ साफ किए। पैर भी साफ किए। इसके बाद कहीं चला गया। बाद में आया तो उसकी शर्ट पानी से गीली थी।
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बाथरूम में टांग दी शर्ट
पुलिस के आने पर उसे लगा कि पकड़ा जाएगा। इसलिए बाथरूम में शर्ट को टांग दिया। इसके बाद पेंट को भी धो दिया। वह नहाने भी चला गया। वह पुलिस के आने से पहले ही पीछे के रास्ते से भाग गया। यह हरकत सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई थी। पुलिस ने कैमरों के फुटेज को अहम मानते हुए अपनी जांच का हिस्सा बनाया। विवेचक निरीक्षक विजय विक्रम सिंह थे। उन्होंने राजवीर को घटना के कुछ देर बाद ही गिरफ्तार कर लिया था। 30 दिन बाद आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल कर दिया था।
ट्यूशन के लिए नहीं आने पर परिजन ने दी थी पुलिस को सूचना
एत्मादपुर थाने में बालिका के पिता ने मुकदमा दर्ज कराया था। कहा था कि दोपहर में एक बजे पड़ोस के 8 वर्षीय बालक के साथ बेटी खेलने निकली थी। दोपहर में 3 बजे ट्यूशन पढ़ने जाने के समय तक वापस घर नहीं आई। आसपास के इलाके में तलाश किया तो मिली नहीं। शाम शाम 5:30 पुत्री मृत अवस्था में दिलीप यादव नामक युवक के प्लॉट में पाई गई। उसके सिर पर चोट के निशान थे। बाएं हाथ की उंगली कटी हुई थी। तब पुलिस ने अज्ञात में मुकदमा दर्ज किया था।
15 लोगों की गवाही और साक्ष्य किए गए पेश
एडीजीसी सुभाष गिरी और विशेष लोक अभियोजक विजय किशन लवानियां ने आरोप साबित करने केे लिए और कठोर सजा दिलाने के लिए पैरवी की। वादी मुकदमा, पीड़िता की दादी, चाचा, मृत बालिका के साथ खेल रहे बालक, विवेचक विजय विक्रम सिंह, एसीपी डा. सुकन्या शर्मा सहित 15 गवाह अदालत में पेश हुए।