मोबाइल नंबर करेंगे जारी
मेयर नवीन जैन ने कहा कि शहर में धार्मिक आयोजन, भंडारे और अन्य कार्यक्रम होते हैं, जिनके बाद गंदगी सड़कों पर ही बनी रहती है। आगरा नगर निगम एक मोबाइल नंबर जारी करेगा, जहां भंडारा या अन्य कार्यक्रमों की सूचना देकर सफाई व्यवस्था के लिए निगम कर्मचारियों को बुलाया जा सकेगा। आयोजक प्राइवेट कर्मचारी बुलाकर नालियों में कचरा डलवा देते हैं, इसे रुकवाया जाएगा।
जहां पड़ रहा था कूड़ा, लगवाए फव्वारे व गमले
मेयर नवीन जैन ने लोगों से अपील की कि आदतों में बदलाव से शहर को साफ कर सकते हैं। विजय नगर में जिस जगह पर डलाबघर था, वहां निगम ने फव्वारा लगवा दिया। अब यहां गंदगी फेंकने की जगह लोग सेल्फी के लिए आते हैं। वहीं भगवान टाकीज के पास नगला पदी का डलाबघर हटवाकर गमले रखवा दिए। 63 जगहों से डलाबघर हट चुके हैं। लोग सहयोग करें तो एक साल के अंदर पूरे शहर में एक भी डलाबघर नजर नहीं आएगा।
करने होंगे ये काम
- शहर के 350 से ज्यादा डलाबघरों को हटाना।
- कूड़े से बिजली बनाने के प्लांट की शुरूआत हो, जिसमें 1600 मीट्रिक टन कचरा हर दिन खप सकेगा।
- सड़क पर कचरा फेंकने पर सख्ती से जुर्माना।
- डोर-टू-डोर, कचरा उठाने पर जीपीएस से निगरानी।
- एनजीओ, सोसायटी, स्कूलों में जागरूकता कार्यक्रम कराना।
- लेदर कतरन, पेठा, गोबर एकत्र कर कमाई के साधन बनाना।
कूड़े से कमाई का मॉडल
आगरा नगर निगम के सामने स्वच्छता सर्वे में सबसे बड़ी चुनौती नालों में लेदर की कतरन के बैग, तबेलों से निकला गोबर और नूरी दरवाजा में पेठे का कचरा है, जिसे नालों में डालने से पूरी सफाई व्यवस्था चौपट हो रही है। अपर नगर आयुक्त सुरेंद्र प्रसाद यादव ने बताया कि दो साल में आगरा को नंबर एक बनाने के लिए कूड़े से कमाई का मॉडल अपनाया जाएगा।
जिसमें घर घर में चमड़े की कतरन को नगर निगम की डेडिकेटेड गाड़ियां एकत्र करेंगी और री-साइकिल करने के साथ ऐसे प्रोडक्ट बनाने पर जोर देंगी, जिससे प्लांट संचालक की कमाई हो सके। कतरन से दरी, टाइल्स आदि बनाने की पहल हो सके। इसी तरह सीएसई से पेठा उद्योग का सर्वे हो चुका है। पेठे के कचरे से खाद बनाने की शुरुआत की जाएगी, वहीं गोबर से उपले और खाद बनाने का प्लांट लगाया जाएगा।