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मुलायम सिंह की पहली पुण्यतिथि: 'नेताजी' के सहारे यूं ताकतवर कुनबा बना सैफई परिवार, दिल्ली का सफर किया तय

Tue, 10 Oct 2023 08:20 AM IST
धीरेन्द्र सिंह संवाद न्यूज एजेंसी, मैनपुरी

सार

मुलायम सिंह यादव ने खुद तो मैनपुरी के रास्ते लोकतंत्र के मंदिर का रास्ता तय किया है, आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उन्होंने सियासी जमीन तैयार की। सैफई परिवार की जब तीन पीढ़ीं दिल्ली गईं तो मैनपुरी ही हर बार सीढ़ी बनी। मैनपुरी से मुलायम के बाद उनके भतीजे और पौत्र भी चुनाव जीतकर सांसद बने। वहीं मुलायम के निधन के बाद खाली हुई सीट पर उनकी पुत्रवधू डिंपल यादव सांसद हैं।
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मुलायम सिंह यादव - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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समाजवाद के प्रतीक मुलायम सिंह यादव की प्रथम पुण्यतिथि आज है। उनके पैतृक गांव सैफई में श्रद्धांजलि दी जाएगी। यहां आयोजित होने वाले कार्यक्रम में सपा अध्यक्ष व पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव समेत दिग्गज पार्टी नेता मौजूद रहेंगे। वहीं मैनपुरी से भी बड़ी संख्या में लोग सैफई जा रहे हैं। वैसे बात करें मैनपुरी की तो मुलायम सिंह यादव ने  यहीं से लोकतंत्र के मंदिर का रास्ता तय किया है। 2014 के लोकसभा चुनाव में सैफई परिवार लोकसभा चुनाव में सबसे ताकतवर कुनबे के रूप में सामने आया था।
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मैनपुरी और आजमगढ़ से खुद सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव जीतकर आए थे तो वहीं फिरोजाबाद से भतीजे अक्षय यादव, बदायूं से भतीजे धर्मेंद्र यादव, कन्नौज से पुत्रवधू डिंपल यादव सांसद चुनकर आई थीं। वहीं मुलायम के मैनपुरी सीट छोड़ने के बाद पौत्र तेजप्रताप यादव ने मैनपुरी उप चुनाव में जीत दर्ज की थी। लेकिन जब-जब सैफई की नई पीढ़ी ने दिल्ली जाने का मन बनाया हर बार मैनपुरी को ही मुलायम ने सीढ़ी बनाया।

2004 में मुलायम सिंह यादव ने मैनपुरी लोकसभा सीट छोड़ी तो भतीजे धर्मेंद्र यादव को पहली बार मैनपुरी से लोकसभा चुनाव लड़ाया। मुलायम का जादू मतदाताओं के सिर चढ़कर बोलता था, नतीजन धर्मेंद्र यादव मैनपुरी से जीतकर लोकसभा पहुंचे। ये सैफई परिवार की मुलायम के बाद मैनपुरी के रास्ते संसद जाने वाली दूसरी पीढ़ी थे।
 

मुलायम यहीं नहीं रुके, 2014 के लोकसभा चुनाव में मुलायम ने मैनपुरी और आजमगढ़ दो सीटों से जीत दर्ज कीं। उन्होंने मैनपुरी सीट छोड़कर इस बार अपने पौत्र तेजप्रताप यादव यानी तीसरी पीढ़ी को मैदान में उतारा। तेजप्रताप यादव भी मैनपुरी से जीतकर दिल्ली पहुंचे। वहीं मुलायम सिंह यादव के निधन के बाद जब उप चुनाव हुआ तो पुत्रवधू डिंपल यादव को भी मैनपुरी के मतदाताओं ने जीत का ताज पहनाया।

मैनपुरी से ही सैफई कुनबे की पहली बेटी ने राजनीति में रखा कदम
सैफई परिवार के बेटों की सियासी धाक से तो हर कोई वाकिफ है, लेकिन सैफई परिवार के बेटियां सियासत से दूर ही रहीं। लेकिन जब सैफई कुनबे की बेटी ने राजनीति में कदम रखा तो उसके लिए भी मैनपुरी ही चुना गया। मुलायम सिंह यादव की भतीजी और पूर्व सांसद धर्मेंद्र यादव की बहिन संध्या उर्फ बेबी यादव 2015 में मैनपुरी से जिला पंचायत सदस्य का चुनाव जीतकर जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। हालांकि 2021 में संध्या यादव ने भाजपा से चुनाव लड़ा और हार का सामना करना पड़ा।
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बेटे अखिलेश ने भी चुनी करहल की राह
2022 के विधानसभा चुनाव में जब भाजपा ने सीएम पद के दावेदार योगी आदित्यनाथ के चुनावी मैदान में उतारने की घोषणा की तो सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव ने भी विधानसभ चुनाव लड़ने का एलान कर दिया। अब बारी थी तो सीट चुनने की। पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ने उतरे अखिलेश ने पिता की कर्मभूमि मैनपुरी की करहल विधानसभा सीट को ही चुना। अखिलेश यादव ने यहां से बंपर वोटों से जीत दर्ज की।
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