ऐसे बनता है टेसू ईको फ्रेंडली रंग
सबसे पहले टेसू के फूलों को पानी के साथ बड़े-बड़े ड्रमों में भिगोया जाता है। उसके बाद फूलों का रस निकाला जाता है। निकले रस में चूने को मिलाकर वापस ड्रमों में भर दिया जाता है। इस प्रकार तैयार किया जाता है टेसू ईको फ्रेंडली रंग, फिर खेली जाती है विश्व प्रसिद्ध लठामार होली।
श्रीजी मंदिर बरसाना के सेवायत संजय गोस्वामी ने बताया कि आजकल के जो रंग बाजार में मिलते हैं वो मिलावटी होते हैं। किसी भी हुरियारे-हुरियारिन व श्रद्धालुओं को त्वचा संबधित परेशानी हो सकती है, लेकिन टेसू के फूलों से तैयार ईको फ्रेंडली रंग से त्वचा को किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंचती, साथ ही इसकी खुशबू से मन में ताजगी बनी रहती है और होली का वातावरण महकने लग जाता है। दिल्ली से टेसू के 10 क्विंटल फूल मंगाए गए हैं।