मैनपुरी। खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की ओर से जांच के लिए भेजे गए मिश्रित दूध के दो नमूने जांच में फेल हो गए। इनमें तरल ग्लूकोज की मिलावट की गई थी। मधुमेह से पीड़ित लोगों के लिए यह हानिकारक है। विभाग ने दूध विक्रेताओं के खिलाफ मुकदमा दायर किया है।
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन की टीम ने दो माह पहले पांच दूध के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे थे। इनमें से दो नमूने फेल हो गए। तीन अधोमानक पाए गए। एक नमूना औंछा के गांव भगवंतपुर निवासी दशरथ सिंह से लिया गया था तो वहीं दूसरा नमूना देवपुरा निवासी संजीव कुमार से लिया गया था।
जांच में पता चला कि इन दोनों नमूनों में तरल ग्लूकोज की मिलावट की गई थी। विभाग ने दोनों के खिलाफ अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम न्यायालय में मुकदमा दायर किया है। जिला चिकित्सालय के डॉ. धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि ग्लूकोज युक्त दूध का सेवन करने से मधुमेह रोगियों में बेहोशी, हार्ट अटैक या मल्टी ऑर्गन फेल्योर जैसी समस्याएं हो सकती है। इससे रोगी की मृत्यु भी हो सकती है।
एसएनफ बढ़ाने के लिए करते हैं मिलावट
खाद्य सुरक्षा एवं औषधि विभाग के अनुसार दूध में ग्लूकोज की मिलावट एसएनएफ बढ़ाने के लिए की जाती है। वर्तमान में एसएनएफ की मात्रा के आधार पर ही दूध की कीमत निर्धारित होती है। ऐसे में दूध से क्रीम निकालने के बाद तरल ग्लूकोज की मिलावट की जाती है।
जांच में दूध के दो नमूनों में ग्लूकोज पाया गया है। दूध में ग्लूकोज की मिलावट लोगों के लिए हानिकारक हो सकती है। दोनों विक्रेताओं के खिलाफ न्यायालय में मुकदमा दायर किया गया है।
डॉ. टीआर रावत, अभिहित अधिकारी एफएसडीए।