दो से तीन मिनट का पड़ता है दौरा: डॉ. सर्वेश
आगरा स्ट्रोक एसोसिएशन के अध्यक्ष वरिष्ठ न्यूरो फिजीशियन डॉ. सर्वेश अग्रवाल ने बताया कि 10 से 15 तरह के दौरे होते हैं, जिसमें से हाथ-पैरों में ऐंठन, मुंह से झाग आना, चलते-चलते धड़ाम से गिर जाना, किसी को देखकर चौंक जाना, किसी दीवार या अन्य को देखते ही रहने के मरीज अधिक हैं। इनका उपचार तीन से पांच साल तक चलता है। लगातार इलाज कराने से ऐसे 98 फीसदी मरीज ठीक हो जाते हैं।
इन बातों का रखें ख्याल:
- मिर्गी का दौरा आने पर मरीज को एक करवट से लिटा दें।
- आसपास मरीज को घेरकर जमा न हों, हवा आने दें।
- दांत कटकटाने पर अंगुली-चम्मच न डालें, रुमाल या कपड़ा लगा दें।
- जूता-मोजा कतई न सुघाएं, मरीज के हाथ-पैरों को न पकड़ें।
- मरीज खाली पेट न रहे, व्रत करने से बचें।
- आठ घंटे नींद लें, तनाव से बचें।