उन्होंने बताया कि इन दो साल में खासतौर से अक्तूबर-नवंबर और बाकी के दिनों के हालात की तुलना के लिए सांस-फेफड़ों की जांच की गई। अक्तूबर-नवंबर में स्मॉग के चलते मरीजों की हालत धूम्रपान करने वालों से भी ज्यादा गंभीर मिली। इनके फेफड़े की कार्यक्षमता घट गई थी।
खांसी-बलगम की शिकायत पर आए थे
डॉ. जीवी सिंह ने बताया कि स्टडी में जो सात फीसदी नए मरीज मिले उनको जाड़ा शुरू होने पर खांसी-बलगम ज्यादा आ रहा था। सीने में जकड़न की भी दिक्कत थी। दवाएं लेने पर फौरी तौर पर आराम मिलता और फिर से परेशानी होने लगती। चलने-फिरने में भी सांस फूल रही थी। मेहनत का थोड़ा सा कार्य करने पर भी थकान, कमजोरी हो रही थी।
कुल मरीज : 78
बाहर का धूल-धुआं : 7 फीसदी
टीबी की बीमारी : 51 फीसदी
घर में धूल-धुंआ : 42 फीसदी
फेफड़ों को ऐसे रख सकते हैं स्वस्थ
- धूम्रपान न करें, तनाव न पालें, टहलें।
- लंबी सांस लेने का नियमित व्यायाम करें
- गहरी सांस लें और तीन सेकंड तक रोकें।
- हवा को बाहर निकालने के लिए पेट की मांसपेशियों का उपयोग न करें।
- प्रदूषण से बचने को थ्री लेयर मास्क का उपयोग करें।
(जैसा कि डॉ. संतोष कुमार, विभागाध्यक्ष वक्ष एवं क्षय रोग एसएन मेडिकल कॉलेज ने बताया)