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जवाहर बागः गुजर गया साल पर जिंदा हैं कई सवाल

Fri, 02 Jun 2017 02:55 PM IST
टीम डिजिटल आगरा/मथुरा
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jawahar bagh (‌file photo) - फोटो : ब्यूरो/ अमर उजाला, मथुरा
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देश और दुनिया में मथुरा के धार्मिक छवि पर काला दाग बने जवाहर बाग कांड को आज एक साल पूरा हो गया । 2 जून 2016 को मथुरा जवाहर बाग कांड में हुई हिंसा की जांच न्यायिक आयोग के बाद अब सीबीआई कर रही है। साल गुजर गया लेकिन जवाहर बाग अब भी वहीं है। जिला प्रशासन ने पेड़-पौधों को संवार कर वहां की हरियाली लौटा दी लेकिन कई सवाल अब उस भयानक रात के जख्म कुरेद रहे हैं।   
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बता दें कि मथुरा के राजकीय उद्यान जवाहर बाग में मार्च 2014 को स्वाधीन भारत विधि‌क सत्याग्रह नामक संगठन ने दो दिन धरने के नाम पर यहां डेरा डाला। इसके बाद संगठन से जुड़े लोग यहीं के होकर रह गए। इनके मुखिया रामवृक्ष यादव ने सत्याग्रह के नाम पर बेशकीमती सरकारी जमीन पर कब्जा कर लिया। 

रामवृक्ष अपने अटपटे सवालों के नाम पर मथुरा प्रशासन पर दबाव बनाता गया। हालांकि ये कहा जाता रहा कि उसे सत्ता का संरक्षण प्राप्त था। ऐसे में जब भी पुलिस और प्रशासन के लोग बाग को खाली कराने गए तो उन पर रामवृक्ष के गुर्गों ने हमले किए। बाद में एक पीआईएल पर सुनवाई करते हुए इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मथुरा प्रशासन को जवाहर बाग खाली कराने के आदेश दिए। 
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कोर्ट के आदेश पर प्रशासन ने बाग को अवैध कब्जे से मुक्त कराने की कारवाई शुरू की। इसी दौरान दो जून 2016 को बाग की बाउंड्री वाल तोड़ने गई पुलिस टीम पर रामवृक्ष और उसके गुर्गों ने हमला बोल दिया। इसमें मथुरा के तत्कालीन एसपी सिटी मुकुल द्विवेदी और एसओ फरह संतोष कुमार यादव की मौत हो गई। 

बाद में पुलिस ने भी जवाबी कार्रवाई की और भीषण नरसंहार हुआ। इसमें करीब 29 लोग मारे गए। हजारों महिलाओं, बच्चों और बुर्जुगों को पुलिस ने भागने के दौरान गिरफ्तार कर लिया। घटना के बाद पुलिस ने दावा किया कि बाग में हिंसा के दौरान रामवृक्ष की मौत हो गई लेकिन आज तक इसकी वैज्ञानिक पुष्टि नहीं हो पाई है। 

इधर हिंसा में मारे गए एससी सिटी मुकुल द्विवेदी का परिवार न्याय की मांग कर रहा है। न्यायिक आयोग की एक साल तक चली जांच भी अब सीबीआई के ‌हाथ में आने के बाद फिर उसी मोड़ पर आ गई है। ऐसे में जिन सवालों के जवाब न्यायिक आयोग खोज रहा था वे अब भी सवाल ही हैं। 
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इन सवालों के अब तक नहीं मिले जवाब

जवाहर बाग कांड (‌file photo) - फोटो : amarujala
1- जवाहर बाग में लोगों को घुसने की अनुमति किसने दी और क्यों दी
2- मार्च 2014 से 2016 तक बाग खाली कराने को क्या-क्या प्रयास हुए
3- प्रशासन ने कितनी दफा नोटिस जारी किए
4- लगातार होने वाले नुकसान पर क्यों खामोश रहे अफसर 
5- शासन को कितनी दफा जवाहर बाग के लिए रिपोर्ट भेजी
6- फोर्स की मांग कब-कब और किससे की गई थी
7- कितनी दफा पुलिस-प्रशासनिक अफसर बाग खाली कराने पहुंचे
8- खुफिया विभाग समय-समय पर क्या रिपोर्ट प्रशासन को देता रहा
9- जवाहर बाग में रसद पहुंच रही है इसकी जानकारी होने पर क्या किया
10- जवाहर बाग को खाली कराने के लिए क्या प्लान प्रशासन ने बनाया था
11- दो जून को जब हिंसा हुई तो उस दौरान कितने अधिकारी मौजूद थे
12- हिंसा के बाद जवाहर बाग से होने वाली बरामदगी का रिकार्ड
13- हिंसा में मरने वालों की शिनाख्त के वैज्ञानिक आधार क्या है
14- रामवृक्ष की वैज्ञानिक पहचान के लिए किए गए प्रयास
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