नए साल के आगाज के साथ ही जीएसटी (वस्तु एवं सेवा कर) के कई नियमों में बदलाव हो गया है। आगरा के जीएसटी विशेषज्ञ सौरभ अग्रवाल ने बताया कि नियमों में बदलाव एक जनवरी से लागू हो गए हैं। आज से इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के प्रावधान सख्त किए गए हैं।
टैक्स इनवॉइस का पोर्टल पर प्रदर्शित होना अनिवार्य है। धारा 16 और नियम 36 (4) को सख्त किया गया है। किसी महीने का अगर करदाता ने रिटर्न 3-बी नहीं दाखिल किया है तो अगले महीने का जीएसटीआर-1 नहीं भर सकेंगे।
नए साल में महंगा हुआ जूता: जीएसटी बढ़ाने से आगरा के उद्यमियों में आक्रोश, बढ़ोतरी वापस लेने की मांग
ये हुआ बदलाव
- माल पकड़े जाने पर जुर्माना देय कर का 200 फीसदी तक लगेगा, जबकि अभी तक यह 100 फीसदी तक लगता था।
- माल पकड़े जाने पर अगर अपील में जाएंगे तो कारोबारी को प्री-डिपोजिट अर्थदंड का 25 फीसदी जमा करना होगा।
- अगर 18 फीसदी जीएसटी दर का एक लाख रुपये का माल पकड़ा जाता है तो उस पर 36 हजार रुपये अर्थदंड लगेगा और अपील में जाने पर पहले अर्थदंड का 25 फीसदी यानी 9 हजार रुपये जमा करने होंगे। अभी तक केवल 1800 रुपये प्री-डिपोजिट करने होते थे।
- जीएसटीआर-1 में यदि 3-बी के सापेक्ष अधिक कर घोषित कर दिया है तो विभाग बिना कारण बताओ नोटिस दिये रिकवरी कर सकेगा।
- संस्थाओं द्वारा सदस्यों से प्राप्त शुल्क अब जीएसटी के दायरे में आएगा।
- कुर्की के प्रावधान आज से चार गुना ज्यादा हो जाएंगे। फर्जी इनवॉइस जारी करने वाले मास्टरमाइंड पर कुर्क ी की कार्रवाई होगी।
- रिटर्न, स्क्रूटिनी के मामलों में, जिसमें एएसएमटी 10 जारी है, वह कुर्की के दायरे में रहेंगे।
- कारोबारियों को अनुशासित विक्रेताओं से ही रिश्ते रखने होंगे अन्यथा विक्रेता की गलती का खामियाजा क्रेता को उठाना पड़ सकता है।