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प्रधान की कुर्सी पर पहुंचा मनरेगा मजदूर: हाथ जोड़कर मांगे वोट, एटा के मतदाताओं ने तोड़ा धन-बल का मिथक

Sun, 13 Jun 2021 01:03 PM IST
Abhishek Saxena राजीव वर्मा, अमर उजाला, एटा

सार

जलेसर ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत बेरनी में विजय सिंह प्रधान चुनने के बाद गांव के कायाकल्प का खाका तैयार कर रहे हैं। पूरे चुनाव में उन्होंने नामांकन पर ही तय धनराशि खर्च की।
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एटा: मनरेगा मजदूर विजय सिंह बने गांव के प्रधान - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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धन-बल का पर्याय बनते जा रहे ग्राम प्रधान चुनाव में एक मनरेगा मजदूर की जीत ने मिथक तोड़े हैं। जलेसर ब्लॉक क्षेत्र की ग्राम पंचायत बेरनी में विजय सिंह प्रधान चुनने के बाद गांव के कायाकल्प का खाका तैयार कर रहे हैं। पूरे चुनाव में उन्होंने नामांकन पर ही तय धनराशि खर्च की। चुनाव प्रचार बिना खर्च लोगों के हाथ जोड़कर किया। इसके बावजूद व्यवहार के दम पर लोगों ने उन्हें अन्य धनी प्रत्याशियों पर वरीयता दी।

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ग्राम पंचायत में बेरनी के अलावा शाहगढ़ी, नगला राधे, रामरायपुर गांव शामिल हैं। आबादी करीब 3552 है। सवर्ण बहुलता में हैं। इस बार प्रधान पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित किया गया था। मनरेगा व दिहाड़ी पर मजदूरी करने वाले विजय सिंह ने गांव वालों के कहने पर परचा भर दिया।

टूटे-फूटे घर में मरम्मत कराने लायक पैसे नहीं थे तो चुनाव प्रचार में क्या खर्च करते। पैदल घूमते हुए पैर छूकर और हाथ जोड़कर वोट मांगे। परिणाम सामने आए तो विरोधी ही नहीं, उनके समर्थक भी चौंक गए। कड़े मुकाबले में वह 52 मतों से विजयी हुए। 

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नवनिर्वाचित प्रधान विजय सिंह का घर - फोटो : अमर उजाला
रही कांटे की टक्कर
चुनाव विजय सिंह के लिए आसान नहीं था। कुल पांच प्रत्याशियों में सरवीर सिंह और पुष्पा देवी काफी मजबूत स्थिति में थी। सरवीर दो बार प्रधान रह चुके थे जबकि पुष्पा देवी के परिजन पुलिस महकमे में हैं। विजय सिंह बताते हैं कि विपक्षी प्रत्याशियों की ओर से लाखों रुपये खर्च किए जा रहे थे। खाने-पीने की व्यवस्था के कारण उधर भीड़ भी बहुत थी। ऐसे में लोगों को अपने पक्ष में मतदान के लिए तैयार करना काफी चुनौती भरा रहा। 
2005 में भी लड़े थे चुनाव
विजय सिंह 2005 में भी इसी पंचायत पर प्रधान पद का चुनाव लड़े थे लेकिन 289 वोटों से शिकस्त का सामना करना पड़ा। गांव के लोगों के मुताबिक तब उनके वृद्ध पिता पन्नालाल फूट-फूटकर रोए थे। जिसे देख अगले चुनाव में लोगों ने उन्हें लड़ाने और जिताने का मन बनाया। लेकिन बीच के दो कार्यकाल में सीट ओबीसी और सामान्य रही।
कहते हैं प्रधान
गांव की बड़ी समस्या मुख्य संपर्क मार्ग की है। दस साल पुराने खड़ंजा को हटवाकर इंटरलॉकिंग कराएंगे। इसके अलावा गांव के अंदर नाली बनवाकर जलभराव खत्म करेंगे। बच्चों की शिक्षा, युवाओं को रोजगार आदि के लिए ग्राम पंचायत स्तर पर जोर देंगे।
विजय सिंह, प्रधान
 
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लोगों की बात
विजय सिंह राजनीतिक व्यक्ति नहीं हैं। सभी लोगों ने सहयोग कर चुनाव लड़ाया। कार्यों में भी सहयोग करेंगे। - डॉ. ध्रुव कुमार पचौरी, प्राचार्य

एक प्रत्याशी पूर्व में दो बार प्रधान रह चुके हैं। इस बार नए प्रत्याशी को मौका दिया है। उम्मीद है अच्छा काम करेंगे। - मुकेश कुमार

इनकी छवि साफ-सुथरी है। ऐसे में लोगों को पूरा भरोसा है कि वह ईमानदारी के साथ विकास कार्य कराएंगे। - सचिन सिसौदिया

विजय सिंह पर न तो प्रचार में खर्च करने को पैसा था और न ही लोगों ने खर्च कराया। उनके व्यवहार पर वोट दिए। - संजय पाराशर
 
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