ये है मामला
थाना खेरागढ़ में दर्ज प्राथमिकी के अनुसार, थाना सैंया के गांव अयेला निवासी गोपीचंद ने आरोप लगाया था कि उनकी ताई रामश्री निसंतान थीं। इस कारण उनकी संपत्ति के वह इकलौते वारिस हैं। 1 अगस्त, 1997 को ताई का निधन हो गया। इसके बाद ताई की जमीन से संबंधित वारिसान प्रार्थनापत्र सहायक चकबंदी अधिकारी के कार्यालय में प्रस्तुत किया। प्रार्थनापत्र के निस्तारण के दौरान गांव सरोदपुरा निवासी महावीर सिंह, भरत सिंह, विद्याराम, राजाराम और रामप्रकाश ने अज्ञात महिला को रजिस्ट्रार कार्यालय में ताई दर्शाकर जमीन की फर्जी वसीयत बनवा ली।
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खुद को बाताया था जमीन का मालिक
उनके वारिसान प्रार्थनापत्र पर आपत्ति प्रस्तुत कर खुद को जमीन का मालिक बताया। अदालत के आदेश पर 17 सितंबर, 1997 को आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई थी। उक्त मुकदमे में गोपीचंद के अलावा तत्कालीन ग्राम प्रधान रामा देवी, तत्कालीन उप प्रधान रामदेवी की गवाही दर्ज हुई। विचारण के दौरान महावीर सिंह, विद्याराम और राजाराम की मृत्यु हो गई। अदालत ने उनके विरुद्ध मुकदमे की कार्रवाई समाप्त कर दी।
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