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Agra News: मैनपुरी में अतिक्रमण और नालों के गंदे पानी की भेंट चढ़ गई ईशन नदी

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नदी में गिरता नाला। - फोटो : samvad
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मैनपुरी। ईशन नदी की बदहाली किसी से छिपी नहीं है। जिले में यह नदी अतिक्रमण और नालों के गंदे पानी के गिरने के कारण बदहाली की भेंट चढ़ गई है। मगर, अब उम्मीद जगी है कि शायद इसका जीर्णोद्धार हो जाए। ईशन नदी के संरक्षण संबंधी याचिका पर एनजीटी (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) में सुनवाई हुई है। एनजीटी ने डीएम मैनपुरी को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। 17 जुलाई को अगली सुनवाई होगी।
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नगर पालिका मैनपुरी क्षेत्र में छह नालों का गंदा पानी ईशन नदी को अपवित्र कर रहा है। सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग ने सर्वे कर रिपोर्ट पिछले दिनों तैयार की थी। इस सर्वे ने नगर पालिका के दावों की पोल भी खोल दी थी। दावों में लगातार कहा जा रहा था कि ईशन नदी में कोई भी नाला नहीं गिर रहा है। जबकि सर्वे में नाले गिरने की बात सामने आई थी। इसके बाद डीएम ने कार्ययोजना भी तैयार हुई। कई विभागों को अलग-अलग जिम्मेदारी दी गई। मगर, यह सभी बातें सिर्फ कागजी साबित हुईं। धरातल पर कोई काम नहीं शुरू हुआ।


ईशन नदी पर एक नजर
ईशन नदी का उद्गम एटा से 14 किमी दक्षिण-पश्चिम की ओर नगला सुजान गांव के पास जनसाई माइनर से है। नदी की कुल लंबाई 317.300 किलोमीटर की है। यह नदी उद्गम स्थल से बहते हुए एटा, मैनपुरी, कन्नौज एवं कानपुर नगर की तहसील बिल्हौर तक पहुंचते हुए वहां गंगा नदी में मिलती है। इस नदी के जीर्णोद्धार को लेकर काफी समय से मांग चल रही है। नदी वर्तमान में नाले के रूप में तब्दील हो चुकी है।
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112 किलोमीटर है मैनपुरी में ईशन नदी
ईशन नदी की मैनपुरी में कुल लंबाई 112 किलोमीटर की है। मैनपुरी के शहरी क्षेत्र में इसकी लंबाई 5.159 किलोमीटर की है। नदी की तली की चौड़ाई 10 से 12 मीटर और नदी में पानी की गहराई 3.52 मीटर है।

ड्रोन सर्वे में यह खुला था राज
ईशन नदी के पुनर्जीवन के लिए पुसैना पुल से मैनपुरी-कुरावली पुल तक ड्रोन से सर्वे किया गया था। सिंचाई विभाग ने स्थलीय निरीक्षण में ईशन नदी में गिरने वाले नालों, कूड़े-कचरे के स्थानों व अन्य महत्त्वपूर्ण पुलों (जहां पर नगर पालिका, मैनपुरी एवं स्थानीय नागरिकों द्वारा कूड़ा-कचरा फेंका जाता है) को चिह्नित किया गया था। सर्वे में नदी में गिरने वाले नाले का नाम और उसके गिरने का स्थान भी चिह्नित किया गया था। रिपोर्ट के अनुसार दिलीपपुर-सथिनी नाला नदी में दीवानी रोड डीआर मैरिज होम के पास गिरता है। सतीश मॉल के पास से गुजरता नाला भी नदी में गिर रहा है। ईशन नदी पुल पर ही नाला नदी में गिर रहा है। इसके अलावा चांदेश्वर रोड पर गुजरता नाला, मस्जिद के निकट शहरी नाला, श्मशान घाट पुल से गुजरता नाला भी नदी में गिर रहा है। वहीं, एचपी गैस गोदाम से गुजरता हुआ शहरी क्षेत्र का नाला भी इसी नदी में गिर रहा है।


जिम्मेदारी मिली, लेकिन काम शुरू नहीं
ईशन नदी के जीर्णोद्धार के लिए प्रस्तावित कार्ययोजना में कई विभागों को काम दिए गए थे। मगर, किसी भी विभाग ने अभी काम शुरू नहीं किया। इसमें नगर पालिका और जल निगम को नालों की टेपिंग, चैंबर बनाने, अपशिष्ट पदार्थ रोकने, जल प्रवाह रोकने वाले जलीय पौधों की सफाई, नदी किनारों पर अवशिष्ट पदार्थों को डालने से रोकने का जिम्मा दिया था। ईशन नदी में गिरने वाले नालों का मासिक जल परीक्षण का जिम्मा उप्र प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को दिया था। धार्मिक सामग्री को नदी में डालने से रोकना, शहर में नदी के पुलों पर बैरीकेटिंग कराने का काम नगर पालिका परिषद और पीडब्ल्यूडी को दिया था। होटलों व रेस्टोरेंट के वेस्ट पदार्थों को नदी में डाले जाने से रोकने का जिम्मा भी नगर पालिका परिषद को दिया था। नदी की भूमि का सीमांकन कर मुक्त करने का काम राजस्व विभाग एवं सिंचाई विभाग को दिया था।
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