कासगंज सोरोंजी में खंडहर हाल में मेहता संस्कृत पाठशाला की यज्ञशाला
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सोरोंजी (कासगंज)। शतायु पूर्ण कर चुकी तीर्थनगरी की मेहता संस्कृत पाठशाला की प्राचीन यज्ञशाला देखरेख के अभाव में खंडहर में तब्दील हो गई है। इस यज्ञशाला में बैठकर पाठशाला के आचार्य व छात्र वेद रचनाओं का पाठ करते हुए यज्ञ किया करते थे, लेकिन अब जब इसका आधुनिकीकरण हो गया है तो यहां अध्ययनरत विद्यार्थी भी यज्ञशाला में धार्मिक अनुष्ठान कर सकेंगे। यज्ञशाला के कायाकल्प का जिम्मा अब डीएम ने उठाया है। जल्द ही इसका जीर्णोद्धार कराने का भरोसा दिया है।
पाठशाला के ट्रस्ट की अध्यक्ष डीएम हर्षिता माथुर हैं। डीएम ने निजी व स्वयंसेवी संस्थाओं की मदद से पुस्तकालय का दोबारा संचालन कराया है। जब डीएम विद्यार्थियों से संवाद कर रहीं थी तो विद्यार्थियों ने कहा कि आधुनिकीकरण देखकर तो बेहतर लग रहा है, लेकिन यज्ञशाला खंडहर होने के कारण धार्मिक अनुष्ठानों की सीख नहीं मिल पा रही। डीएम ने कहा कि बहुत जल्द यज्ञशाला का जीर्णोद्धार कराया जाएगा।
यज्ञशाला का इतिहास
तीर्थंनगरी की मेहता संस्कृत पाठशाला की यज्ञशाला का 1980 में एक संस्कृत प्रेमी ने निर्माण कराया था। उस समय पाठशाला के प्रधानाचार्य धर्मानंद कोठयारी थे। उनकी 16 वर्ष की पुत्री प्रज्ञादेवी की अल्पायु में मृत्यु हो गई थी। यज्ञशाला के अंदर प्रज्ञादेवी की मूर्ति भी लगी हुई है किंतु देखरेख के अभाव में यह यज्ञशाला खंडहर में तब्दील हो गई है। यहां अध्ययन करने वाले विद्यार्थी उस समय धार्मिक अनुष्ठानों की सीख लेते थे।
क्या बोले आचार्य
पाठशाला के आचार्य वीरेंद्र शर्मा ने बताया कि इस यज्ञशाला में प्रतिमाह पूर्णिमा तिथि को पाठशाला के सभी छात्र व आचार्य यज्ञ किया करते थे। चैत्र व कार्तिक मास में पाठशाला में तीन दिन तक विशेष धार्मिक अनुष्ठान चलते थे, महायज्ञ का आयोजन होता था। इसमें दूर-दूर से संस्कृत विद्वान, वेदपाठी, आमजन भाग लेते थे और वे धार्मिक अनुष्ठान करने में परिपक्व होतेे थे।
- मेहता संस्कृत पाठशाला का आधुनिकीकरण कराया जा रहा है। यहां जल्द ही यज्ञशाला का जीर्णोद्धार कराया जाएगा। यहां के विद्यार्थियों से संवाद किया तो उन्होंने कुछ समस्याएं बताईं। उन सभी का समाधान कराया जाएगा। इस पाठशाला को बेहतर बनाने का लक्ष्य तय कर लिया है। - हर्षिता माथुर, डीएम।