उन दिनों बापू की तबियत कुछ नासाज थी। देश भर में लगातार भाग-दौड़ और बैठकों का सिलसिला चल रहा था। ऐसे में बापू ने आगरा में दो दिन प्रवास का मन बनाया। दस सितंबर 1929 में अपने साथियों के साथ यमुना किनारे आकर रुके। यहां का शांत माहौल और कल-कल बहती यमुना उन्हें इतनी भा गई कि वह 11 दिन तक ठहरे। क्षेत्रीय लोगों से मिले और अहिंसा के पथ पर चलकर आजादी प्राप्त करने का आह्वान किया।
महात्मा गांधी देशभर में आजादी का जनजागरण अभियान चलाए हुए थे। आगरा में भी उन्होंने कांग्रेस नेताओं से मुलाकात करने का मन बनाया। उनकी तबियत भी ठीक नहीं थे। वे शहर के प्रमुख जौहरी रामकृष्ण मेहरा के अतिथि बन कर आगरा आ गए और यमुना किनारे उनके भवन में ठहरे। दस सितंबर 1929 को वे दो दिन के प्रवास के लिए आगरा आए थे लेकिन यहां उनका मन लग गया और 21 सितंबर तक यहीं रुके रहे।
मराठा शैली का है भवन
जिस भवन में महात्मा गांधी रुके थे, सन 1948 में उनके निधन के बाद रामकृष्ण मेहरा के पुत्र बृजमोहन दास मेहरा ने भवन एवं परिसर को गांधी स्मारक के लिए दान कर दिया। मुख्य भवन मराठा शैली में निर्मित दो मंजिला भवन है। वर्षों तक इस इमारत में नगर प्रसूता अस्पताल, जच्चा बच्चा कल्याण केंद्र तथा आयुर्वेदिक चिकित्सालय के रूप में संचालित रहा। साल 2015 में जीर्णोद्धार के बाद इसे गांधी स्मारक एवं संग्रहालय के रूप में स्थापित किया गया।
वर्ष 1938 में भी आए थे
वर्ष 1929 के बाद बापू 1938 में भी आगरा आए थे। क्रांतिकारी परिवार से जुड़े शशि शिरोमणी बताते हैं कि उन्होंने यहां कई लोगों से मुलाकात की थी। जमीदारों के अत्याचारों को लेकर वे आगरा से ही मुखर हुए थे। यहां कांग्रेस के तमाम नेताओं के साथ भी उन्होंने बैठकें की थीं।
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