कासगंज। प्राकृतिक सौंदर्य से भरपूर दरियावगंज झील की खूबसूरती के साथ ही रामछितौनी की झील का भी अब कायाकल्प होगा। लखनऊ में वन विभाग ने दोनों झीलों का प्रस्तुतिकरण दिया। प्रशासन ने रामछितौनी झील के लिए भी कार्ययोजना तैयार कराई है।
सर्द मौसम में परिंदों की उड़ान और अठखेलियां अक्सर देखने को मिलती हैं। हालांकि जिले में पक्षियों के कलरव के लिए अब तक कोई बेहतर पर्यटक स्थल अथवा झील नहीं है। ऐसे में अब जिले में झीलों का सुंदरीकरण कराया जाएगा। यूं तो शासन दरियावगंज झील को पहले ही जिले की लीडिंग झील के रूप में चिह्नित कर चुका है, लेकिन अब रामछितौनी की झील को भी सुंदरीकरण की योजना में शामिल किया है।
रविवार को लखनऊ में शासन स्तर पर दरियावगंज और रामछितौनी झील के सौंदर्यीकरण के लिए प्रस्तुतिकरण किया गया। वन विभाग ने दरियावगंज झील का नाम भी बदल दिया है। इस झील का नाम गोखुर आर्द्र संरक्षण केंद्र रखा गया है। लखनऊ में झीलों के सुंदरीकरण का प्रस्तुतिकरण के बाद अब जिले में पर्यटक स्थल विकसित होने की संभावनाएं बढ़ गई हैं। नाम परिवर्तन की अधिसूचना के लिए वन विभाग ने शासन को पूरा प्रस्ताव भी भेज दिया है।
जिले में बनेंगे तीन टूरिस्ट स्पॉट
कासगंज। यदि दरियावगंज और रामछितौनी के सौंदर्यीकरण के लिए शासन से जल्द ही धनराशि मिलती है तो तीन पर्यटक स्थल विकसित होने लगेंगे। दोनों झीलों के अलावा बायो डायवर्सिटी पार्क भी पर्यटक स्थल के रूप में विकसित किया जाएगा।
अन्य मदों से काम शुरू
कासगंज। यूं तो दरियावगंज झील के सौंदर्यीकरण के लिए एस्टीमेट शासन में लंबित है। हालांकि वन विभाग ने अन्य मदों से सौंदर्यीकरण का काम शुरू कर दिया है। दरियावगंज झील पर एक द्वार भी बना दिया गया है। इसे गोखुर आर्र्द संरक्षण केंद्र द्वार का नाम दिया गया है।
- शासन ने दरियावगंज झील के अलावा रामछितौनी के सौंदर्यीकरण के निर्देश दिए हैं। दोनों ही झीलों को विकसित किया जाएगा, जिससे यहां पक्षी भी प्रवास कर सकें।
- दिवाकर वशिष्ठ, डीएफओ।