किशनी को सपा का गढ़ माना जाता है। वर्ष 1993 से यहां समाजवादियों का कब्जा है। वर्ष 2022 के चुनाव में भी सपा ने अपना गढ़ बचाने में सफलता हासिल की। बृजेश कठेरिया पर सपा मुखिया अखिलेश यादव ने फिर से भरोसा जताया था। हालांकि किशनी के कई नेताओं ने इस पर नाराजगी प्रकट की थी। विरोध करने के लिए लखनऊ तक गए थे।
बृजेश कठेरिया को लेकर सपा के ही कुछ नेताओं ने विरोध किया था। टिकट फाइनल होने के बाद किशनी क्षेत्र के पांच बड़े नेता लखनऊ जाकर अखिलेश यादव से मिले थे और बृजेश कठेरिया की टिकट बदलने की मांग की थी। अखिलेश ने उन्हें पुन: सर्वे कराने की बात कहकर वापस कर दिया था। बृजेश ने अखिलेश यादव की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए सपा को लगातार सातवीं बार कब्जा कराया है।
किशनी वर्ष 1989 से मुलायम समर्थकों का गढ़ बना हुआ है। वर्ष 1989 में मुलायम सिंह ने जनतादल पार्टी से रामेश्वर दयाल वाल्मीकि को प्रत्याशी बनाया था। रामेश्वर दयाल वाल्मीकि ने यहां से जीत हासिल की थी। वर्ष 1991 में मुलायम सिंह यादव ने समाजवादी जनता पार्टी से रामेश्वरदयाल वाल्मीकि को टिकट दिया। रामेश्वरदयाल वाल्मीकि ने जीत हासिल की। किशनी विधानसभा क्षेत्र के लोग वर्ष 1989 से लगातार मुलायम सिंह के समर्थन वाले प्रत्याशी को जीत दिला रहे हैं।
वर्ष विधायक