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मून स्कूल ओलंपिक: परिंदों को भी उड़ान भरने की जिद थी, जो मिला सहारा तो आसमां छू लिया

Sun, 30 Oct 2022 10:25 AM IST
मुकेश कुमार सिद्धार्थ चतुर्वेदी, अमर उजाला आगरा

सार

मून स्कूल ओलंपिक के दूसरे दिन कबड्डी के फाइनल मुकाबले में केजीबीएस (कस्तूरबा गांधी बालिका स्कूल)  की टीम ने सेंट एंड्रूज पब्लिक स्कूल को हराकर स्वर्ण पदक जीता। यह जीत केजीबीएस की छात्राओं के लिए बेहद खास है।  
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केजीबीएस की विजेता टीम, ओलंपिक आयोजन समिति की अध्यक्ष बीना लवानियां - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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परिंदों को भी उड़ान भरने की जिद थी, जो मिला सहारा तो आसमां छू लिया...। आगरा के एकलव्य स्पोर्ट्स स्टेडियम में शनिवार को कबड्डी के फाइनल मुकाबले में केजीबीएस (कस्तूरबा गांधी बालिका स्कूल)  की टीम ने सेंट एंड्रूज पब्लिक स्कूल को 16-13 से पराजित कर चैंपियनशिप जीतने के साथ ही इन पंक्तियों का साकार कर दिया। 

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मून स्कूल ओलंपिक में केजीबीएस की यह जीत इसलिए खास हो गई क्योंकि स्कूल में कई जरूरतमंद परिवारों की बच्चियां शिक्षा ग्रहण कर रहीं हैं। खिलाड़ी पूजा ने बताया कि मून स्कूल ओलंपिक में खेलना मेरा सपना था। जीत के साथ यह पूरा हो गया है, जो मेरे लिए कभी नहीं भुलाने देने वाला पल रहा। 

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ओलंपिक आयोजन समिति की अध्यक्ष बीना लवानियां ने खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि प्रतिभाएं सुविधाओं की मोहताज नहीं होती, उन्हें प्रतिभा दिखाने के लिए बस अवसर उपलब्ध करवाने की जरूरत है। केजीबीएस के खिलाड़ियों का प्रदर्शन न केवल तारीफ के काबिल है, बल्कि दूसरों को भी प्रेरित करने वाला है। 

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कुछ कर गुजरने की सोच थी

खिलाड़ी सुनीता कुमार ने बताया कि जीत या हार से फर्क नहीं पड़ता। हमें पहली बार खेलने का अवसर मिला। पूरी टीम की सोच कुछ ऐसा कर गुजरने की थी, जो दूसरी टीमों केलिए मिसाल बने। हमारी नीतियां और कोशिश कामयाब रहीं।

हौसले सुविधाओं के मोहताज नहीं होते: रजत अस्थाना

मून स्कूल ओलंपिक आयोजन समिति के सदस्य रजत अस्थाना का कहना है कि स्कूल के खिलाड़ी इस बार ओलंपिक का हिस्सा बनना चाहते थे। बच्चों के सामने प्रतिभाग करने केलिए कुछ दिक्कतें आ रही थीं। इन दिक्कतों को दूर कर बच्चों ने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया।  उनके स्वर्ण जीतने पर एक बार फिर यह साफ हो गया कि हौसले सुविधाओं के मोहताज नहीं होते। 
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