इस वजह से उल्टी और दस्त की दिक्कतें सामने आने लगती हैं। ये शौक परिजन के लिए भी मुसीबत साबित हो सकता है। खाना बनाने के दौरान नाखूनों की गंदगी से परिवार के लोग भी बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। गर्भ के दौरान शिशु की सेहत को भी नुकसान हो सकता है।
महंगा है तो क्या हुआ, शौक तो शौक है
नाखूनों और त्वचा को बेहतर और स्वस्थ रखने के लिए यह प्रक्रिया हर दो से तीन सप्ताह में करवानी पड़ती है। अगर कुल खर्च जोड़ लिया जाय तो हाथों और पैर के नाखूनों पर प्रति माह तकरीबन दो हजार रुपये का खर्चा है। खंदारी की तान्या कहती हैं कि महंगा है तो क्या...शौक तो शौक है।
विशेषज्ञ कहते हैं ... मुश्किल से बचने के लिए सतर्क रहें
विशेषज्ञों का कहना है कि बीमारियों से बचना है तो लापरवाही न बरतें। मॉइस्चराइज करना न भूलें। खाना खाते या बनाते वक्त नेल पेंट हटा दें। सस्ती पॉलिश से पूरी तरह बचें। रोजाना नाखूनों को साफ करें। वक्त पर ट्रिम करती रहें।