फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जोंस मिल: 250 बीघा जमीन की 1200 रजिस्ट्री, एक-एक जमीन 20-20 बार बिकी, जांच के आदेश

Sun, 23 Aug 2020 01:17 PM IST
मुकेश कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा

सार

  • 'धमाके' से टूटी प्रशासन की नींद, तब खुला 100 साल पुराना मामला
  • जिलाधिकारी ने जमीन प्रकरण की जांच के लिए बनाईं तीन समितियां 
विज्ञापन
जोंस मिल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

आगरा में जोंस मिल की लगभग 250 बीघा जमीन की जांच के लिए जिलाधिकारी प्रभु नारायण सिंह ने तीन समितियां का गठन किया है। इनमें एक समिति 100 साल से ज्यादा पुराने इस मामले के राजस्व रिकॉर्ड की जांच करेगी। यहां चार विभाग की जमीन पर कब्जा किया गया है। सर्वे कर इसकी रिपोर्ट तैयार करने के लिए अलग समिति बनाई गई है। तीसरी समिति यह रिपोर्ट देगी कि सरकारी जमीनों पर निर्माण के लिए एनओसी किस-किस विभाग के कौन से अफसरों ने दी। इस जमीन की 1200 रजिस्ट्री हुई और एक-एक जमीन 20-20 बार बिकी। 
विज्ञापन


तीनों रिपोर्ट आने पर बड़ा खुलासा हो सकता है, क्योंकि शिकायतों में यह कहा गया है कि जोंस मिल को 1031 वर्ग मीटर जमीन बेची जा चुकी है। बिल्डरों ने नगर निगम की नजूल, सिंचाई विभाग की डूब क्षेत्र और नगर विभाग की जमीन पर कब्जा कर मल्टी स्टोरी बिल्डिंग खड़ी कर दी हैं। पुलिस चौकी की जमीन पर भी कब्जा कर लिया गया है। 


एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव ने बताया कि पूरे प्रकरण की सिलसिलेवार जांच की जा रही है। 100 साल पुराने रिकॉर्ड भी देख जाएंगे। जमींदारी के समय की जमीन किस तरह, किसके नाम दर्ज हुई और फिर किस-किसने, कैसे, कितना और कब बेचा। इसका पूरा ब्योरा तैयार किया जाएगा। सरकारी जमीन चिहिन्त कर कब्जा मुक्त कराई जाएगी। 
विज्ञापन

एडीएम प्रशासन ने बताया कि जोंस मिल क्षेत्र के लोग जमीन के दस्तावेज भेज रहे हैं। इनमें से कई आजादी से पहले के हैं। जो उर्दू में हैं। इनका अनुवाद कराया जाएगा। इसके बाद इनकी जांच होगी। जोंस मिल के 23 खसरों के बैनामे पर रोक लगाई गई हैं। इनमें जिन लोगों की संपत्ति है, उनसे दस्तावेज मांगे गए थे। 

धमाके से हुआ खुलासा

एक महीने पहले जोंस मिल में धमाका हुआ था। यह एक बिल्डिंग खाली कराकर उसे कब्जाने के लिए रज्जो जैन ने कराया था। जमीन की जांच शुरू हुई तो शिकायतें आने लगी कि यहां तो और भी जमीनों पर कब्जे हैं। यहां तक कि सरकारी जमीन पर इमारतें खड़ी हैं। तब जिलाधिकारी ने जांच के आदेश दिए। इसके बाद खुलासा हुआ कि पुलिस चौकी की जमीन पर भी कब्जा हो गया। सरकारी जमीन पर बिल्डिंग की एनओसी दे दी गई। इस पर जांच का दायरा बढ़ाया गया। 

- पहले ग्राम समाज की जमीन ती, अब नगर निगम की है, 90 फीसदी आबादी है।
- 6045 वर्ग मीटर बंजर जमीन है, यह सरकार की है, इस पर भी कब्जा हुआ है। 
- 1150 वर्ग मीटर जमीन नहर विभाग की है, यह कागजों में है, मौके पर कब्जा हो चुका है। 
- 10014 वर्ग मटीर जमीन लोक निर्माण विभाग की है, इस पर सड़कें बनी हैं। 

जोंस मिल के नाम खतौनी में 110 बीघा जमीन दर्ज

जोंस मिल को पांच खसरों में 110 बीघा जमीन मिली। लेकिन मौके पर 23 खसरों में 250 बीघा जमीन खुदबुर्द हो गई। इन जमीनों पर भूमाफिया काबिज हो गए। अनाधिकृत लोगों ने नजूल, नहर, बंजर, नदी व सरकारी भूमि पर 1200 से अधिक बैनामे कर दिए। इनमें जांच टीम को शनिवार तक सिर्फ 20 बैनामों का रिकार्ड मिला है। इसके आधार पर अब इन जमीनों को बेचने वालों पर शिकंजा कसेगा।

जीवनी मंडी क्षेत्र के बैनामे उप निबंधक कार्यालय पंचम में पंजीकृत हुए। 1980 से 2019 तक यहां 1200 रजिस्ट्री 23 खसरों में की गई। उप निबंधक राजा सिंह ने बताया जोंस मिल के 20 बैनामों का रिकार्ड जांच कमेटी को भेजा है। इसमें भाजपा के एक दिवंगत विधायक  ने भी जमीन खरीदी है। उन्होंने कहा पुराने बैनामों का रिकार्ड खंगाला जा रहा है। जो साक्ष्य मिल रहे हैं उन्हें जांच कमेटी के लिए भेजा जा रहा है।
विज्ञापन

'प्रशासन हमारी भी पक्ष सुने'
जिन्होंने सरकारी जमीन पर कब्जा किया है उन पर कार्रवाई होनी चाहिए। प्रशासन हमारा पक्ष भी सुने। एक एक प्लॉट का 20-20 बार बैनामा हो चुका है। हमने 1998 के बाद जमीन खरीदी, पहले भी जांच हो चुकी है।- कृष्णा अग्रवाल

मामले में कोर्ट दे चुका है आदेश
इस मामले में कोर्ट आदेश दे चुका है, प्रशासन को उसे मानना चाहिए। घपला करने वाले बच गए, एकतरफा कार्रवाई न हो। जिसने घपला किया, पहले उसे ढूंढा जाए। उसके बाद आगे की कार्रवाई हो। - सारंग 

'उस समय अफसर क्या कर रहे थे'
अगर यहां सरकारी जमीन पर कब्जा हुआ तो उस समय के अफसर क्या कर रहे थे। एनओसी कैसे दी, उन पर करवाई हो। मेहनत की कमाई से स्टांप ड्यूटी देकर जमीन खरीदने वाले लोगों को परेशान न किया जाए। -अमित अग्रवाल

'क्षेत्र के 1200 परिवार परेशान है'
अगर गलती है तो उन लोगों की है जो जमीन बेचकर चले गए। हमने तो जांच पड़ताल के बाद जमीन खरीदी है। 23 खसरों पर बैनामों की रोक से जोंस मिल क्षेत्र के 1200 परिवार परेशान है। -बृजमोहन अग्रवाल

'मामले की जांच निष्पक्ष होनी चाहिए'
अब 130 साल पुराना रिकॉर्ड देखा जा रहा है। हमें जमीन खरीदे हुए 25 साल भी नहीं हुए। प्रशासन पहले इस इलाके के लोगों की बात सुने। इसके बाद मामले की जांच निष्पक्ष होनी चाहिए। -प्रमोद अग्रवाल
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें