फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

जोंस मिल प्रकरण: नोटिस के जवाबों में उलझी जमीनों की जांच, पांच महीने से विभाग ने नहीं दिए रिकॉर्ड

Thu, 17 Dec 2020 11:02 AM IST
Abhishek Saxena न्यूज डेस्क, अमर उजाला, आगरा
विज्ञापन
जोंस मिल की जगह - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
जीवनी मंडी स्थित जोंस मिल में जमीनों की जांच नोटिस के जवाबों में उलझ गई है। राजस्व, सिंचाई, श्रम, नगर निगम, पीडब्ल्यूडी व एडीए प्रशासनिक नोटिसों को दबाए बैठे हैं। पांच महीने में रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया। ऐसे में जांच प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
विज्ञापन

जोंस मिल के इस हिस्से में हुआ था ब्लास्ट - फोटो : अमर उजाला
जोंस मिल के ट्रांसपोर्ट गोदाम में बम विस्फोट के बाद पुलिस ने नौ लोगों को जेल भेजा था। डीएम प्रभु एन सिंह ने जुलाई में जमीनों की जांच के आदेश दिए। खरीद-फरोख्त पर रोक लगाई। एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव को जांच अधिकारी बनाया। पांच महीने बाद भी जांच बेनतीजा है।

जोंस मिल में पड़ा मलबा - फोटो : अमर उजाला
एडीएम प्रशासन ने बताया कि 120 साल पुराने दस्तावेजों की जांच में समय लग रहा है। जो विभाग इसमें शामिल हैं उन्हें नोटिस भेजे हैं। उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। रिकॉर्ड भी उपलब्ध नहीं कराया। जांच पूरी होने के बाद रिपोर्ट डीएम को भेजी जाएगी। 

जोंस मिल - फोटो : अमर उजाला
प्रशासन पर मामला दबाने का आरोप 
जोंस मिल में 23 खसरों की अगस्त में जांच हुई। इनमें 128 बीघा जमीन मिली। बड़े पैमाने पर सिंचाई व श्रम विभाग की भूमि पर अवैध निर्माण व कब्जे हुए। फिर नवंबर में 40 बीघा सरकारी जमीन का सर्वे कराया। एक-एक निर्माण व कब्जा चिह्नित किया। दोनों जांच के बाद भी रिपोर्ट नहीं बनी। इस मामले में शिकायतकर्ता कपिल वाजपेयी ने प्रशासन पर राजनीतिक दबाव में मामले को दबाने का आरोप लगाए हैं।
विज्ञापन

धर्मस्थल की जमीन भी जांच के दायरे में - फोटो : अमर उजाला
धर्मस्थल की जमीन भी जांच के दायरे में
नायब तहसीलदार ने पैमाइश कर रिपोर्ट दी है कि सरकारी जमीन पर धर्मस्थल भी बना है। इस मामले में डीएम प्रभु एन सिंह ने कहा सरकारी जमीन पर धार्मिक स्थल का निर्माण कानूनन नहीं हो सकता है। जोंस मिल के खसरों में किस टाइटल के आधार पर यह निर्माण हुआ इसकी जांच कराई जा रही है।
 
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें