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जोंस मिल: जांच के बीच बर्खास्त हुए नायब तहसीलदार फिर बहाल, तीन भूमाफिया हुए थे घोषित

Sun, 09 Jan 2022 07:56 AM IST
Abhishek Saxena अमर उजाला ब्यूरो, आगरा

सार

सहारनपुर के एक पुराने मामले में राजस्व परिषद ने जांच के बीच में किया था अक्तूबर 2020 में बर्खास्त
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जोंस मिल - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जोंस मिल में भूमाफिया, कूटरचित दस्तावेजों से हुए बैनामों की जांच के दौरान बर्खास्त हुए सदर तहसील के तत्कालीन नायब तहसीलदार न्यायिक सुनील कुमार को शासन ने फिर से बहाल कर दिया है। जोंस मिल की जांच में उन्होंने 23 खसरों में 128 बीघा सरकारी, सिंचाई भूमि व बिल्डरों पर नजूल की फर्जी एनओसी का खुलासा किया था। 

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सहारनपुर के एक मामले का हवाला देते हुए जांच के बीच उन्हें अक्तूबर 2020 में राजस्व परिषद की अध्यक्ष मनीषा त्रिघाटिया ने बर्खास्त किया था। तब सुनील कुमार ने कहा था कि राजनीतिक दबाव में जोंस मिल की जांच को प्रभावित करने के लिए उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई है। तत्कालीन एडीएम प्रशासन निधि श्रीवास्तव की अध्यक्षता में तब सुनील कुमार ने ही जोंस मिल में बेशकीमती सरकारी जमीनों के खुदबुर्द होने और कूटरचित दस्तावेजों से जमीनों की खरीद-फरोख्त होने का खुलासा किया था। जांच पूरी नहीं हो सकी थी। तभी जांच के बीच उन्हें हटा दिया गया। दो महीने बाद जांच पूरी हुई तो जोंस मिल में 2596 करोड़ रुपये की जमीनों का फर्जीवाड़ा सामने आया। तीन भूमाफिया घोषित हुए। एक भूमाफिया की संपत्ति जब्त की गई है। बाकी भूमाफिया के विरुद्ध प्रशासन ने एक साल बाद भी कोई कार्रवाई नहीं की। जोंस मिल प्रकरण में एक विधायक का रिश्तेदार भी भूमाफिया घोषित हो चुका है। 
दो बार नहीं दे सकते दंड
बर्खास्तगी के विरुद्ध नायब तहसीलदार ने शासन में अपील की। पांच जनवरी को शासन ने बर्खास्तगी आदेश को निरस्त करते हुए नायब तहसीलदार को पुन: बहाल कर दिया। बहाली आदेश में अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने कहा जिस मामले में बर्खास्त किया गया, उसमें पहले ही आरोपित की तीन वेतन वृद्धि रोकी जा चुकी थी। एक मामले में दो बार दंड नहीं दे सकते। बहाल होते ही नायब तहसीलदार राजस्व परिषद में पदस्थापित हो चुके हैं।
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ये था पूरा मामला
सहारनपुर में 2012 में तहसील मनिहारन में तैनाती के दौरान चकरोड से बिना अनुमति पेड़ उखाड़ने, बिना पुलिस बल के खेल मैदान की पैमाइश कराने, उचित दर विक्रेता के चयन में कानून व्यवस्था भंग करने और उच्च अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना जैसे आरोप लगे थे। सहारनपुर मंडल के अपर आयुक्त प्रशासन ने जांच में आरोपों को सही पाया। उनकी रिपोर्ट के आधार पर परिषद ने नायब तहसीलदार को 2020 में बर्खास्त कर दिया था। जबकि इसी मामले में 2015 में उनके तीन वेतन वृद्धि रोकी जा चुकी थीं। 

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